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श्राद्ध कर्म से मिलेगा पितरों का आर्शिवाद।

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बुधवार छह सितंबर से शतभिषा नक्षत्र पितृ पक्ष का आरंभ
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मवाना। शिव सरस्वती मंदिर के पुजारी पं. मोहन जोशी ने बताया कि बुधवार छह सितंबर से शतभिषा नक्षत्र पितृ पक्ष का श्राद्ध आरंभ होगा। पितरों के श्राद्ध कर्म से सुख और शांति की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि श्राद्ध कर्म करने से शारीरिक और मानसिक पीड़ा से मुक्ति मिलती है। पूर्वजों का श्राद्ध कर्म विधि विधान से करने से पितरों की कृपा हमेशा बनी रहती है। उन्होंने बताया कि अश्वनी मास में पूर्वज मृत्युलोक में आते हैं। इसलिए उनका श्राद्ध करना चाहिए। अन्न, वस्त्र का दान देने से पितृ स्वर्ग में शांति प्राप्त करते हैं।
श्राद्ध की विधि- जिस दिन परिवार के पुरखों का श्राद्ध तिथि हो, उस दिन सूर्य उदय से लेकर दिन में 12 बजकर 25 मिनट की अवधि के मध्य श्राद्ध करें। सुबह उठकर स्नान कर, पितृ स्थान को गाय के गोबर से लेपकर गंगाजल से पवित्र करें। घर की महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन बनाएं। निमतिरत ब्राह्मण के पैर धोएं, पितरों की पूजा व तर्पण आदि करवाएं। पितृ के निमित्त गाय का दूध, दही, घी, खीर का अर्पण करें। ब्राह्मण द्वारा संकल्प करके गाय, कुत्ते, कौआ के लिए भोजन सामग्री निकालें। ब्राह्मण को दक्षिणा देकर विदा करें।
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दान की सामग्री- जौ, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, गुड, चांदी, नमक का दान करें। पितरों के निमित्त अपनी सामर्थ्य अनुसार शास्त्र विधि से श्रद्धा से श्राद्ध करता है उसके सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं।
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