- चौथे दिन भी कर्मचारियों ने नहीं खोला प्लांट का ताला
- जल निगम के अधिकारी भोला झाल पहुंचे कर्मचारियों को मनाने
- वेतन भुगतान से पहले मानने को तैयार नहीं कर्मचारी
- नगरायुक्त और जल निगम अधिकारियों ने की वार्ता
- महापौर जल निगम पहुंचे, जतायी नाराजगी
मेरठ। वेतन की मांग को लेकर हड़ताल पर बैठे भोला झाल गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट संचालन करने वाली कंपनी के कर्मचारी आश्वासनों से सहमत नहीं हैं। उन्होंने बुधवार को भी प्लांट का ताला नहीं खोला। समझाने पहुंचे जल निगम के अधिकारियों को कर्मचारियों के विरोध के कारण खाली हाथ वापस लौटना पड़ा। कर्मचारी वेतन मिलने से पहले किसी भी कीमत पर प्लांट का संचालन करने से इंकार कर रहे हैं। चार दिन से शहर में गंगाजल की आपूर्ति नहीं हो रही है। शहर में पानी की सप्लाई नगर निगम के संसाधनों से की जा रही है।
जेएनएनयूआरएम योजना के तहत 343 करोड़ रुपये खर्च करके शहर में गंगाजल परियोजना शुरू की गयी थी। जिसमें भोले की झाल पर ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया और शहर में पाइप लाइन डाली गयी। कहने को तो लगभग आठ माह पहले भोले की झाल से शहर में गंगाजल लाया गया, लेकिन लगातार गंगाजल की सप्लाई नहीं हो सकी है। कभी कंपनी ने प्लांट संचालन बंद किया तो कभी कर्मचारियों ने वेतन की मांग करते हुए संचालन से हाथ खड़े कर दिए। रविवार से कर्मचारियों ने छह माह के वेतन की मांग करते हुए प्लांट पर ताला लगा रखा है। जल निगम, नगर निगम और जिला प्रशासन प्लांट का संचालन नहीं करा पा रहा है। बुधवार को भी पूरे दिन प्लांट के कर्मचारी प्लांट पर ताला लगाकर धरने पर बैठे रहे।
तो कर्मचारियों को नहीं मिलेगा वेतन
मेरठ। भोला झाल पर गंगाजल ट्रीटमेंट प्लांट संचालन करने वाले कर्मचारियों का वेतन फंसता नजर आ रहा है। क्योंकि जहां अब तक जल निगम और नगर निगम के अधिकारी कर्मचारियों के वेतन को लेकर शासन को पत्र लिखे जाने की बात कर रहे थे वहीं बुधवार को जलनिगम के प्रोजेक्ट मैनेजर भारत भूषण ने मामले को नया मोड़ दे दिया। उन्होंने कहा कि वाटर ट्रींटमेंट प्लांट को प्रतिभा कंपनी ने बनाया है। कंपनी के साथ हुए अनुबंध की शर्तों के अनुसार प्रतिभा कंपनी को लगातार चार माह ट्रायल के रूप में प्लांट को चलाना होगा। इस दौरान कर्मचारियों के वेतन पर खर्च होने वाला धन भी कंपनी ही ही वहन करेगी। कंपनी ने अभी तक लगातार चार माह प्लांट नहीं चलाया है। चार माह पूरे होने से पहले ही कुछ न कुछ समस्या आती रही है। जल निगम अधिकारी के बयानों से साफ हो गया है कि कर्मचारियों को वेतन फंस गया है।
दो करोड़ के खर्च की शासन से लेंगे अनुमति
मेरठ। नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान का कहना है कि उन्हें अपने स्तर से आठ लाख रुपये खर्च का निर्णय लेने का अधिकार है। इससे ऊपर के खर्च के लिए शासन से अनुमति लेनी पड़ती है। इसलिए हम शासन को पत्र लिखकर गंगाजल प्लांट संचालन पर आने वाले वर्ष में दो करोड़ रुपये के खर्च की अनुमति लेंगे। अनुमति मिलने के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी। इस बीच गंगाजल प्लांट संचालन कराने के लिए जल निगम के अधिकारी प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि वह प्रतिभा कंपनी के अधिकारी व कर्मचारियों को मनाने में कामयाब हो जाएंगे। वैसे शहर में जलापूर्ति फिलहाल नगर निगम अपने संसाधनों से करा रहा है।
महापौर बोले, गंगाजल आपूर्ति में न हो लापरवाही
मेरठ। शहर में गंगा जल आपूर्ति प्रभावित होने पर महापौर हरिकांत अहलुवालिया बुधवार को जल निगम पहुंच गए। उन्होंने जल निगम के परियोजना प्रबंधक भारत भूषण से नाराजगी जताते हुए कहा कि बार बार गंगाजल आपूर्ति में लापरवाही बरती जा रही है। 343 करोड़ की गंगाजल परियोजना को लेकर जल निगम अधिकारी गंभीर नहीं हैं। जलापूर्ति आवश्यक सेवाओें में आती है। उन्होंने कहा कि वह इस संबंध में नगरायुक्त से भी वार्ता करेंगे। साथ ही धन की कमी के अभाव में गंगाजल परियोजना प्रभावित होने की पूरी रिपोर्ट शासन को भी भेजेंगे ताकी भविष्य में इस तरह से परियोजना न रुके। इस अवसर पर पार्षद हरीश कुमार, सहन्सरपाल, राकेश शर्मा, कैलाश, राजू वर्मा, गौरव आदि भी उनके साथ रहे।
343 करोड़ का प्रोजेक्ट फंसने के लिए अफसर जिम्मेदार
- नगर निगम
नगरायुक्त का कहना है कि उन्हें संचालन खर्च की शासन से अनुमति लेनी होगी। ये समझ से परे है कि अभी तक अनुमति क्यों नहीं मांगी गई। क्यों लटकने दिया संचालन का मामला। निगम प्लांट का संचालन अपने हाथ में क्यों नहीं ले रहा है।
जल निगम
- जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर भारत भूषण का कहना है कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार प्रतिभा कंपनी को चार माह तक लगातार प्लांट चलाकर देना होगा। जल निगम ने प्रतिभा कंपनी के सामने ये बात अब से पहले क्यों नहीं रखी। अगर कंपनी अनुबंध की शर्तोें को तोड़ रही है तो कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं कराई जा रही। क्यों 343 करोड़ के प्रोजेक्ट को लेकर बयानबाजी के अलावा कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।
प्रतिभा कंपनी के कर्मचारी
- वेतन न मिलने पर संचालन ठप कर रखा है। अगर निगम या जलनिगम इनके वेतन के लिए जिम्मेदार नहीं तो क्यों प्लांट का संचालन अपने हाथ में नहीं ले रहे सरकारी विभाग। निगम और जलनिगम के अधिकारी प्राइवेट कंपनी प्रतिभा के आगे नतमस्तक क्यों है। सरकारी प्लांट पर प्राइवेट कर्मचारियों का कब्जा क्यों होने दिया जा रहा है।