अमर उजाला ब्यूरो
रोहटा (मेरठ)।
कृमि रोधक दिवस के मौके पर पेट के कीडे़ मारने वाली गोली खाकर भदौड़ा गांव में पूर्व माध्यमिक विद्यालय के पांच बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। आनन फानन में शिक्षक और परिजन बच्चों को सीएचसी ले गये, जहां उन्हें जिला अस्पताल रैफर कर दिया। गुस्साए परिजनों ने शिक्षकों पर लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा कर दिया।
राज्य सरकार द्वारा बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए साल में दो बार 10 फरवरी व 10 अगस्त को पेट के कीडे़ मारने वाली गोली (एल्बेंडाजोल ) खिलाई जाती है। सरकार द्वारा इस कार्यक्रम का नाम कृमि रोधक दिवस रखा गया है। बृहस्पतिवार को भी प्रदेश भर में कृमि रोधक दिवस के मौके पर सभी सरकारी स्कूली बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा एल्बेंडाजोल की खोली खिलाई गई। रोहटा क्षेत्र के भदौड़ा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में भी रोहटा स्थित सीएचसी की एक टीम बच्चों को गोली खिलाने के लिए गई। टीम ने स्कूल में मौजूद 42 बच्चों को गोली खिलाई। गोली खाने के कुछ देर बाद ही पांच बच्चे तनु पुत्र लोकेंद्र, हर्ष पुत्र जितेंद्र, शीतल पुत्री बाबूराम, अंकित पुत्र पप्पू, स्नेहा पुत्री अनिल ने चक्कर आने की शिकायत शिक्षिका से की। देखते ही पांचों बच्चों को उलटियां होने लगी। स्कूल के शिक्षक और परिजन उन्हें लेकर रोहटा सीएचसी ले गये, लेकिन बच्चों की खराब हालत को देखते हुए उन्हें जिला अस्पताल के रैफर कर दिया गया। बाद में बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती कर लिया गया।
लापरवाही का आरोप लगाकर हंगामा
घटना के बाद सीएचसी में ग्रामीणों का जमावड़ा लगने लगा। परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग की टीम व स्कूल के शिक्षकों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। इस दौरान परिजनों ने शिक्षकों और सीएचसी के स्टाफ के साथ धक्का मुक्की भी की। सूचना पर पहुंचे रोहटा एसओ ने किसी तरह परिजनों को शांत कराया। परिजनों स्वास्थ्य विभाग की टीम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग कर थाने में तहरीर दी।
खाने का बाद ही जा जाती है गोली
रोहटा सीएचसी प्रभारी सुधीर कुमार ने एल्बेंडाजोल खाने के बाद तबीयत बिगड़ने का कारण बच्चों का खाली पेट होना बताया। उन्होंने बताया कि गोली का साल्ट काफी हैवी होता है और आम तौर पर इस गोली को रात में अथवा हैवी नाश्ता करने के बाद खाने की सलाह दी जाती है। यदि इस गोली को खाली पेट खा लिया जाता है तो गोली के इस प्रकार के रिएक्शन सामने आते हैं। बच्चों को गोली खिलाने से पहल उनसे नाश्ता करने के बारे में पूछना चाहिए था।
बच्चों के सेहत में है सुधार
बीएसए सतेंद्र ढाका का कहना है कि शासन के आदेश पर पूरे जिले के स्कूलों में ही बच्चों को एल्बेंडाजोल की टेबलेट दी गईं है। जांच में सामने आया कि खाली पेट गोली खाने से बच्चों की हालत बिगड़ी है। बच्चों की सेहत में सुधार हो गया।
खाली पेट टेबलेट खाने की वजह से खराब हुई तबियत: सीएमओ
सीएमओ डॉ. राजकुमार ने बताया कि चार बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए हैं। खाली पेट एल्बेंडाजोल की टेबलेट लेने के कारण इनकी तबियत बिगड़ी थी। वह अस्पताल में उन्हें देखकर आए हैं। दो बच्चे ठीक हैं, जबकि दो बच्चों के पेट में हल्का दर्द हैं। उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पेट के कीड़े ही बच्चों में खून की कमी और एनिमिया का कारण बनते हैं। देश में हर साल बहुत से बच्चे एनिमिया से ग्रसित होते हैं। बच्चों में शारीरिक कमजोरी और चिड़चिड़ापन इस बीमारी के मुख्य लक्षण हैं। उन्होंने बताया कि यह एक से 19 साल उम्र तक के बच्चों, किशोरों और युवाओं को खिलाई जाती है। मेरठ में नौ लाख को खिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
खास बातें
कृमि रोधक दिवस के मौके पर पूरे जिले में परिषदीय स्कूलों में दी गई थी एल्बेंडाजोल की टेबलेट
भदौड़ा के विद्यालय में गोली खाते ही पांच बच्चों को होने लगी उल्टी, अस्पताल में भर्ती