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80 साल की उम्र में पीएचडी करने का जज्बा

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मोदीपुरम/मेरठ। कहते हैं कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है। ऐसा ही एक मामला मंगलवार को सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पीएचडी की काउंसिंलिग में देखने को मिला। यहां कानपुर से 80 साल के एक बुजुर्ग पीएचडी करने के लिए प्रवेश लेने पहुंचे। लेकिन एक रैंक से पिछड़ने के कारण उनका एडमिशन नहीं हो सका।
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इस बार प्रदेश की संयुक्त प्रवेश परीक्षा मोदीपुरम के सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने कराई थी। परीक्षा के बाद मंगलवार को विवि के गांधी भवन में पीएचडी की काउंसिंलिग थी। जिसके लिए अभ्यर्थियों की रिपोर्टिंग सोमवार को की गई थी। एडमिशन बुधवार को होने हैं। मेरठ में पीएचडी की 98 सीटें हैं। मंगलवार को कानपुर निवासी जोगेंद्र सिंह डेयरी एंड टेक्नोलॉजी से पीएचडी करने के लिए विवि में पहुंचे। कानपुर में इस कोर्स की दो ही सीट थीं। इनमें एक जनरल और दूसरी एससी की थी। वहीं जोगेंद्र की रैंक तीसरी थी। पहले वाला नहीं आया तो एससी वाले को नियमानुसार एडमिशन दे दिया गया। एक रैंक से पिछड़ने के कारण जोगेंद्र को एडमिशन नहीं मिल सका। रजिस्ट्रार डॉ. आरआर सिंह ने बताया कि बुधवार को यूजी की स्पेशल काउंसिंलिग है। इसमें 211 अभ्यर्थियों ने रिपोर्टिंग कराई है। अब पीएचडी की काउंसिलिंग छह अगस्त को आयोजित की जाएगी।
चार साल से दे रहे परीक्षा
सरदार जोगेंद्र सिंह 2014 से लगातार परीक्षा दे रहे हैं। लेकिन हर बार एक रैंक से उनका एडमिशन रुक जाता है। जज्बा ऐसा है कि उम्र 80 साल की होने के बाद भी वह पीएचडी करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।
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अभी बचा है एक मौका
सरदार जोगेंद्र सिंह के लिए अभी एक और मौका बचा है। अभी एससी की सीट बची है। सेकेंड काउंसिंलिग में उन्हें बुलाया जाएगा। इस सीट पर यदि एससी का अभ्यर्थी नहीं आता है तो फिर उनका नियमानुसार जनरल श्रेणी में बदलकर एडमिशन कर दिया जाएगा। इसमें सरदार जोगेंद्र सिंह का नंबर आ सकता है।
कानपुर में चलाते हैं डेयरी
सरदार जोगेंद्र सिंह कानपुर में डेयरी चलाते हैं। विवि के अनुसार वह डेयरी के व्यापार को बढ़ावा देने और इसे हाइटेक करने के चलते पीएचडी करना चाहते हैं। वर्तमान में भी उनके पास में 200 से अधिक पशु हैं। इसी को बढ़ावा देने के लिए वह हर बार एडमिशन के लिए प्रयासरत हैं।
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खास बात
- पीएचडी की कानपुर में दो सीटें थीं, बुजुर्ग की रैंक थी तीसरी
- कानपुर के रहने वाले हैं डेयरी संचालक बुजुर्ग, नहीं मिला प्रवेश
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