अक्सर सरकारी विभाग रोना रोते रहते हैं कि सरकार से बजट नहीं मिला इसलिए कार्ययोजना बनने के बाद भी प्रोजेक्ट शुरू नहीं हो पाया। लेकिन नगर निगम और जल निगम के उन अधिकारियों को क्या कहा जाए जो सरकार से दो साल पहले से 150 करोड़ रुपये स्वीकृत होने के बावजूद शासन की मंशा के अनुरूप सीवर और पानी की लाइन का जाल बिछाने की कार्ययोजना तक नहीं बना पाए। विकास की पटरी से उतरा स्थानीय सिस्टम जनता को सब्जबाग तो सरकार के आदेशों को रद्दी की टोकरी दिखाता रहा।
सीवर लाइन से मिलेगी जलभराव से मुक्ति
शहर के एक बड़े इलाके में सीवर लाइन ठप पड़ी हैं। सरकार ने शहर की जनता को सीवर लाइन की सुविधा देने के लिए अमृत योजना संचालित की। साल 2017 से साल 2022 तक के लिए एक योजना तैयार की गयी। जिसमें सरकार की मंशा थी कि साल 2022 तक शहर में पूरी तरह सीवर लाइन का जाल बिछ जाएगा। शहरों को बरसात में जलभराव की समस्या नहीं झेलनी पड़ेगी। सरकार की योजना को सुनकर महानगर की जनता भी खुश हुई थी। लेकिन दो साल में अमृत योजना के तहत जारी 150 करोड़ रुपये से सीवर लाइन डलना तो दूर कार्य योजना भी तैयार नहीं हो सकी। जिससे साफ जाहिर है कि अभी भी महानगर की जनता को बरसात में जलभराव से ही जूझना पड़ेगा।
नाले और पुरानी सीवर लाइन का एक कनेक्शन
घंटाघर क्षेत्र यानी पुराने शहर में सीवर लाइन तो है। लेकिन काफी साल पुरानी है। पुरानी सीवर लाइन का जुड़ाव नालों से हो गया है। जिसके कारण पूरा इलाके की सीवर लाइन चोक रहती है। इस सीवर लाइन पर भी नगर निगम का जलकल और जल निगम ने कोई काम नहीं किया है। जिसके कारण शहर के बड़े इलाकों में अभी भी सीवर खुले में बह रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन का सपना भी साकार होता नहीं दिख रहा है।
जेएनएनयूआरएम में डली सीवर लाइन से हुआ सुधार
जेएनएनयूआरएम योजना के तहत महानगर में डाली गयी सीवर लाइन और बनाए गए सीवर ट्रीटमेंट प्लांटों का लाभ काफी हद तक मिल रहा है। लेकिन उन्हीं क्षेत्र की जनता को जहां पर सीवर लाइन डल चुकी है। अगर सरकार की 150 करोड़ की अमृत योजना पर भी काम होता तो शहर की जनता को खुले में बहते सीवर से बड़ी राहत मिलती। हालांकि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि 150 करोड़ से शहर के कम से कम 40-45 वार्डों में सीवर लाइन डल सकती है। इनमें से कुछ इलाकों में पुरानी सीवर लाइन को भी चालू किया जा सकता है।
शासन के रिमाइंडर खपाते रहे अधिकारी
दो साल में केंद्र और राज्य सरकार अमृत योजना के तहत सीवर सिस्टम की कार्य योजना बनाने के लिए नगर निगम और जल निगम को रिमाइंडर जारी करती रही। लेकिन अधिकारी हैं कि सरकार के सभी पत्रों को इधर-उधर खपाते रहे। जो जनता के सामने जीता जागता सुबूत है। अभी तक भी नगर निगम का जलकल विभाग और जल निगम कार्य योजना तैयार करने की पहल नहीं कर रहा है।
पानी कनेक्शन के लिए दस करोड़
सरकार ने पानी कनेक्शन के लिए भी दस करोड़ रुपये की योजना नगर निगम जलकल विभाग और जल निगम को दी। लेकिन दोनों विभाग इसकी कार्य योजना भी तैयार नहीं कर पाए। शहर में अवैध पानी कनेक्शन के कारण काफी क्षेत्रों में गंदा पानी आता है। जिसके कारण शहर में आए दिन बीमारी फैली रहती है।
कार्ययोजना तो बनानी थी
सीवर और पानी की पाइप लाइन के प्रपोजल बनाने का कार्य जल निगम का होता है। 150 करोड़ रुपये की कार्य योजना भी उन्हीं को बनानी थी। निगम में जल निगम ने पत्र भेजे जरूर थे। लेकिन उनको विभाग ने उनकी जिम्मेदारी से अवगत करा दिया था। अगर जल निगम समय रहते कार्य योजना तैयार करता तो शहर की जनता को बड़ा लाभ मिलता। -सुनील सिंहल, अधिशासी अभियंता जल कल नगर निगम।