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15 दिन में चढ़ा 10 करोड़ का ‘बुखार’

Sat, 03 Sep 2016 01:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 पिछले 15 दिनों में बुखार पर करीब 10 करोड़ रुपये लोग खर्च कर चुके हैं। चारों ओर हाहाकार मचा है। शहर या देहात में कोई घर ऐसा नहीं है, जो बुखार से पीड़ित न हो। सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पताल मरीजों से भरे पड़े हैं। पिछले एक सप्ताह में स्थिति और ज्यादा खराब हुई है। डेंगू, वायरल और चिकनगुनिया की दहशत ऐसी है कि लोग सामान्य बुखार में भी जांच करा रहे हैं। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से बीमारियां अधिक फैल रही हैं।
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 वायरल संक्रमण के बीच चिकित्सक अधिकांश मरीजों की पैथोलॉजी जांच करा रहे हैं। सामान्य जांच भी 400 से लेकर 500 रुपये की बीच हो रही है, जबकि डेंगू की कंप्लीट जांच पर 1800 से 2500 रुपये प्रति मरीज को खर्च करने पड़ रहे हैं। शहर में तीन बड़ी कंपनियों की पैथोलॉजी लैब हैं, जिन पर प्रतिदिन वायरल से जुड़ी करीब 2500 मरीजों के ब्लड सैंपल पहुंच रहे हैं। जिले में 25 अन्य मेजर लैबों को मिलाकर करीब 197 लैब हैं। इनमें से कुछ पर प्रतिदिन 200 से 300 सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं। अन्य का औसत प्रति लैब 100 के आसपास है।

जिले में कुल लैब - 197
मेजर लैब  -  25
बड़ी कंपनियों - तीन लैब
सामान्य वायरल जांच - 400 से 500 रुपये (कंप्लीट ब्लड व मलेरिया पेरासाइड)
प्रतिदिन सैंपल कलेक्शन - करीब 12500
प्रतिदिन जांच पर खर्च धनराशि - 50 लाख
दस दिन में जांच पर खर्च - करीब 5 करोड़ रुपये

महंगा पड़ा रहा अस्पताल खर्च
बुखार की सटीक जानकारी के लिए जांच जरूरी है, क्योंकि बीमारी का पता चलने पर ही चिकित्सक सटीक दवाई देते हैं। लेकिन शहर के कुछ अस्पताल इसका गलत फायदा भी उठा रहे हैं। दो दिन भर्ती होने पर मरीज का खर्च 10 से 15 हजार के बीच आ रहा है। पांच से सात दिन भर्ती रहने वाले मरीज से 40 हजार से ज्यादा वसूले जा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में अब तक करीब आठ सौ चिकनगुनिया और डेंगू के गए हैं, यानी इनमें से अधिकांश मरीज अस्पतालों में भर्ती हुए हैं। सीएमओ कार्यालय मानकर चल रहा है कि जिले भर के अस्पतालों में ढाई हजार से अधिक मरीज भर्ती हुए हैं।
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अस्पताल का खर्च
15 दिनों में मरीज भर्ती - 2 से तीन हजार
एक मरीज का औसत खर्च - 15 से 20 हजार
तीन हजार मरीजों का खर्च - साढ़े चार करोड़ रुपये के आसपास

एंबुलेंस को भी बड़ा फायदा  
वायरल के मौसम में एंबुलेंस संचालकों की आमदनी बढ़ गई है। क्योंकि आमदनी कुछ मरीजों को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल में रेफर होना पड़ रहा है, तो कुछ मरीजों को भर्ती होने के बाद जांच के लिए रेडियोलॉजी सेंटरों पर जाना पड़ रहा है। एंबुलेंस संचालक शहर में 500 रुपये प्रति मरीज के हिसाब से ले रहे हैं।

जनता बुखार से बेहाल, चिकित्सक फरमा रहे आराम
 लोग बुखार से बेहाल हैं और चिकित्सक आराम फरमा रहे हैं। शासन के सख्त निर्देश के बाद भी डॉक्टर समय से अस्पताल नहीं पहुंच रहे हैं। शुक्रवार को कार्यवाहक सीएमओ डॉ. शरद त्यागी के निरीक्षण में पूरी व्यवस्था की पोल खुल गई। 13 सीएचसी में से चार पर कोई स्टाफ नहीं मिला। बाकी सीएचसी पर भी हालत बद से बदतर मिले। ओपीडी के वक्त चिकित्सक घरों में आराम फरमा रहे थे, जबकि मरीज इलाज के लिए लाइनों में खड़े थे।
सीएमओ का कार्यभार संभालने के अगले ही दिन डॉ. शरद त्यागी ने टीमें बनाकर निरीक्षण के लिए भेजा। 10 चिकित्सक अधिकारियों के साथ स्वयं भी दौरे पर निकल पड़े। दौराला और भावनपुर में अधिकांश स्टाफ ओपीडी टाइम पर अस्पताल में नहीं था। जिले में 26 चिकित्सक और 39 कर्मचारी अनुपस्थित मिले। डॉ. शरद त्यागी ने कहा कि अनुपस्थित मिले सभी चिकित्सकों व कर्मचारियों की एक दिन की सैलरी काटने के साथ ही नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट डीएम और मुख्यालय भेज दी है। अब एडिशनल पीएचसी से लेकर उपकेंद्रों का भी निरीक्षण किया जाएगा।

अस्पतालों का ये मिला हाल
सीएचसी                    अनुपस्थित
दौराला                       7 चिकित्सक, 4 कर्मचारी
भावनपुर                     7 चिकित्सक, 14 कर्मचारी
भूड़बराल                    4 चिकित्सक, 7 कर्मचारी
हस्तिनापुर                    3 चिकित्सक, 3 कर्मचारी
माछरा                         4 कर्मचारी
सरूरपुर खुर्द                   2 कर्मचारी
सरधना                         1 चिकित्सक, 2 कर्मचारी
दबथुआ                     1 चिकित्सक
मवाना                        3 चिकित्सक, 3 कर्मचारी
जानीखुर्द                     कोई नहीं
रोहटा                          कोई नहीं
परीक्षितगढ़                    कोई नहीं
खरखौदा                       कोई नहीं


बुखार से सात साल के बच्चे की मौत
 रोहटा ब्लॉक के गांव ख्वाजमपुर माजरा में बुखार के कारण सात साल के बच्चे की मौत हो गई। गांव ख्वाजमपुर माजरा निवासी सतवीर शर्मा के सात वर्षीय पुत्र सूर्यांश को सोमवार से बुखार था। परिजनों ने उसे रोहटा बाईपास स्थित अस्पताल में भर्ती कराया। बृहस्पतिवार की देर रात बच्चे की तबीयत ज्यादा खराब हो गई। चिकित्सकों ने सूर्यांश को दूसरे अस्पताल में दिखाने की सलाह दी। परिजन उसे सुभारती अस्पताल ले गये। लेकिन भर्ती करने के कुछ देर बाद ही शुक्रवार सुबह बच्चे ने दम तोड़ दिया। गांव के प्रवीण, मोनू, अमित, सहदेव ने बताया कि बुखार से पूरा गांव तप रहा है। वहीं सीएचसी प्रभारी सुधीर कुमार के आदेश पर चिकित्सकों की टीम ने गांव पहुंचकर लोगों की जांच की। गांव में तीन दिन तक कैंप लगाया जाएगा।
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