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पापा को इंसाफ कके लिए लखनऊ में भी धरना देने को तैयार

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(अन्य केंद्रों के ध्यानार्थ)
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पिंटू राणा की मौत के बाद बेटे और पत्नी ने कहा, इंसाफ के लिए लड़ेंगे
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मोदीपुरम (मेरठ)
लखनऊ से मेरठ लौटते समय शिकाहाबाद हाईवे पर सड़क हादसे में पिंटू राणा की मौत हो गई थी। जबकि चालक और उनका साथी बच गया था। मौत के बाद अब नई-नई बाते सामने आ रही हैं तो मामला हत्या का लग रहा है। पत्नी और बच्चों ने भी हत्या का आरोप लगाया है। इस मामले में दोनों बेटों का कहना है कि उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो लखनऊ में धरना देंगे।
एक जुलाई को सपा नेता पिंटू राणा की हादसे में मौत हो गई थी। गाड़ी में प्रदीप गर्ग और चालक दिनेश भी सवार थे, लेकिन उन्हें मामूली चोट आई थी। पिंटू राणा की पत्नी ने दो दिन पहले हुई तेरहवी में पूर्व कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव के सामने हत्या का आरोप लगाया था। कहा था कि हत्या कर घटना को हादसे का रूप दिया गया है। जिनके साथ गए थे, हत्या का आरोप उन पर ही लगाया है। शिवपाल सिंह यादव से भी निष्पक्ष जांच की मांग की थी। पिंटू राणा के बड़े बेटे अनंत राणा और छोटे बेटे अर्चित राणा का कहना है कि उनके पिता की हत्या की गई है। अभी तक जो भी तथ्य सामने आ रहे है, उससे घटना हत्या की लग रही है। पापा को इंसाफ नहीं मिला तो वह लखनऊ में धरने पर बैठ जाएंगे। इंसाफ के लिए वह अपनी मां शशि राणा के साथ लड़ाई लड़ेंगे।
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पापा ने किसी का क्या बिगाड़ा था
अर्चित अपने पिता का लाड़ला बेटा था। उसका कहना था कि मेरे पापा ने किसी का क्या बिगाड़ा था। जिस अंकल के साथ वह गए थे, पापा ही उन्हें राजनीति में लेकर आए थे। अपना पद छोड़ने के बाद उन्हें बनाया था। जिस दिन उन्हें यह पद दिया गया था, मैं स्वयं उनके पास ही बैठा था। मेरे पापा तो किसी का बुरा भी नहीं करते थे।

हर माह जाते थे वैष्णो देवी
पिंटू राणा हंसमुख और धार्मिक प्रवृत्ति के थे, उनकी माता रानी में श्रद्धा थी। पिछले दो तीन साल से हर माह ही माता वैष्णो देवी के दर्शन करने के लिए जाते थे। पत्नी शशि राणा का कहना है कि वह हर रोज पूजा करते थे। उन्हें क्या मालूम था कि माता रानी भी उनके सुहाग को नहीं बचा पाएगी।

प्रदीप गर्ग के घर जाकर करूंगी बात : शशि राणा
शशि राणा का आरोप है कि उसके पति की हत्या की गई है। अगर हादसा था तो फिर दिनेश और प्रदीप गर्ग ने पूरी घटना क्यों नहीं बताई। बार-बार चालक बयान बदल रहा है। अगर उनसे कोई मिलने जाता है तो वह कुछ नहीं बोलते। दो तीन दिन में वह प्रदीप गर्ग के घर जाकर ही पूरे मामले की जानकारी लेंगी। अभी तक उन्हें यह भी नहंी बताया गया कि हादसा कैसे हुआ है। आगे कौन बैठा था और पीछे कौन था। पिंटू तो गाड़ी को धीमी चलवाते थे, फिर गाड़ी तेज क्यों चला रखी थी।

शिवपाल यादव पर ही भरोसा
शशि राणा का कहना है कि अब उनका कोई सहारा नहीं है। भाई साहब शिवपाल यादव और जयचंद भदौरिया को पूरे मामले की जानकारी दी गई है। उन्हें जो थोड़ी बहुत बातें पता हैं, वह भी उन्हें बता दिया गया है। अब भाई साहब पर ही पूरा भरोसा है, वही उन्हें न्याय दिलाएंगे। न्याय के लिए वह पीछे नहीं हटेंगी।
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मैं तो बेहोश हो गई थी
शशि राणा का कहना है कि मैं तो शव को देखकर बेहोश हो गई थी। उनके सिर में ही चोट थी, अगर में घटना स्थल पर जाती तो वहां कुछ पता भी चलता। जिस तरह से गाड़ी के फोटो देखे हैं, उससे यह तो साफ है कि चोट सिर में नहीं शरीर में अन्य जगह पर भी होनी चाहिए थी। दो अन्य लोग कैसे सुरक्षित रह गए।
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