जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट व जेल जाने से घबरा रहे व्यापारी
कार्यशालाओं के बाद वाणिज्य कर अधिकारियों ने निकाला निष्कर्ष
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने की तारीख जैसे-जैसे पास आ रही है व्यापारियों का डर बढ़ता जा रहा है। इस वक्त उन्हें इनपुट टैक्स क्रेडिट का डर सबसे ज्यादा सता रहा है। इस वजह से उन्होंने स्टॉक घटाना शुरू कर दिया है। व्यापारियों को जेल जाने का भी डर है। जीएसटी के बारे में हुई कार्यशालाओं के बाद वाणिज्य कर अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला है।
अब व्यापारी 10 से 15 दिन का ही स्टॉक रख रहे हैं, आमतौर पर वे 30 से 45 दिन का स्टॉक रखते थे। बता दें कि इनपुट टैक्स क्रेडिट कच्चे माल पर दी गई ड्यूटी है जो सरकार वापस करेगी। व्यापारियों को फिक्र है कि इससे उनका पैसा फंस सकता है। रिफंड मिलने में देरी से वर्किंग कैपिटल की कमी हो सकती है। रिफंड को लेकर सरकार से विवाद का भी डर है। इसकी वजह से उत्पादन के लिए लोन लेना पड़ सकता है। छोटी और मंझोली कंपनियों को इससे ज्यादा डर है। दरअसल, इनपुट टैक्स क्रेडिट पाने के लिए जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन जरूरी है। सामान भेजने और लेने वालों के आंकड़े एक होने चाहिए। अगर होल सेलर ने 100 आइटम भेजे हैं लेकिन रिटेलर ने 90 दिखाए तो 90 पर छूट मिलेगी। अगर आंकडा मिसमैच हुआ तो सिस्टम से आटोमेटिक सूचना जाएगी। अगर सामान टूट या खो गया तो इनपुट क्रेडिट नहीं होगा। व्यापारियों के लिए 25 जून से फिर से जीएसटी पोर्टल खुल रहा है।
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दो से पांच करोड़ की चोरी पर होगी कार्रवाई
एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर वीएन सिन्हा ने बताया कि व्यापारियों को जेल जाने का डर सता रहा है। जबकि हकीकत ये है कि दो से पांच करोड़ की टैक्स चोरी साबित होने पर कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें भी दो करोड़ तक कार्रवाई के लिए कमिश्नर की अनुमति लेने पड़ेगी, ये जमानती अपराध होगा। पांच करोड़ या उससे ज्यादा टैक्स चोरी साबित होने पर गैर जमानती अपराध होगा।
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क्या है जीएसटी
जीएसटी यानि गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स। ये एक ऐसा टैक्स है, जो टैक्स के भारी जाल से मुक्ति दिलाएगा। जीएसटी आने के बाद बहुत सी चीजेें सस्ती हो जाएंगी, हालांकि कुछ जेब पर भारी भी पड़ेंगी। सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि टैक्स का पूरा सिस्टम आसान हो जाएगा। 18 से ज्यादा टैक्सों से मुक्ति मिलेगी और पूरा देश में सिर्फ एक टैक्स होगा जीएसटी।
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सही आंकड़े भरें, कोई दिक्कत नहीं होगी
वाणिज्य कर के ज्वाइंट कमिश्नर एचपी राव दीकति ने बताया कि अगर कोई कारोबारी अपनी बिक्री के बारे में आंकड़े ध्यानपूर्वक अपलोड करेगा तो मुश्किल नहीं होगी। इससे उस कारोबारी के आंकड़े बेमेल नहीं होंगे। कर भुगतान और कर प्राप्ति के इस विवरण को ही रिटर्न के तौर पर दाखिल करना होगा।
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यह डर भ्रांतियों की वजह से है, जिसे दूर किया जा रहा है। भ्रांतियां खत्म होगी तो डर भी खत्म हो जाएगा। इसके लिए कार्यशालाएं की जा रही हैं। व्यापारियों को अपनी खरीद के आंकड़े दर्ज करना और उपभोक्ताओं को की गई बिक्री का रिकार्ड भी जीएसटीएन प्लेटफार्म पर अपलोड करना है। पुराने माल पर चुकाई गई एक्साइज वापस होगी। रिफंड जल्द से जल्द करने की कोशिश की जाएगी।
- विजय नंदन सिन्हा, एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर
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साढ़े 28 हजार करा चुके माइग्रेट
वाणिज्य कर विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जीएसटीएन में मेरठ से करीब साढ़े 28 हजार कारोबारी माइग्रेट करा चुके हैं, जबकि करीब साढ़े चार हजार व्यापारी अभी भी बाकी हैं। इसकी वजह यही मानी जा रही है कि व्यापारियों को जीएसटी को लेकर डर है।