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महीने का खर्च साढ़े 4 करोड़, फिर भी बंद हो गया कुलपति का फोन

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मोदीपुरम (मेरठ)। जिस यूनिवर्सिटी का एक माह का खर्च 4.50 करोड़ रुपये से ज्यादा का हो, उसके कुलपति डॉ. गया प्रसाद के सरकारी मोबाइल नंबर की सेवा मात्र 1050 रुपये का बिल जमा न होने पर बंद हो जाए तो इससे बड़ी लापरवाही और क्या होगी। इससे नाराज वीसी ने वित्त नियंत्रक (एफसी) को पत्र लिखकर रिपोर्ट मांगी है। एफसी ने जांच बैठाते हुए अकाउंटेंट से स्पष्टीकरण मांग लिया है।
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कृषि एवं प्रौद्योगिकी विवि के 17 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है कि किसी कुलपति की सरकारी मोबाइल फोन सेवा बिल जमा न होने पर बंद कर दी गई हो। मई माह के इस बिल को जमा करने की लास्ट डेट 5 जून थी। कुलपति ने इसके लिए बैंकर्स चेक बनवाने के लिए कंटीजेंट बिल भेजा था, लेकिन 19 जून तक भी चेक नहीं बनवाया गया। वीसी ने एफसी सतेंद्र कुमार को भेजे पत्र में यह भी पूछा है कि वर्तमान में भुगतान के कितने बिल लंबित पड़े हैं। पत्र मिलने के बाद एफसी ने अकाउंटेंट से स्पष्टीकरण मांगा है कि वीसी के मोबाइल फोन का बिल आखिर क्यों जमा नहीं किया गया। उन्होंने लेखाधिकारी अजय तिवारी से जांच आख्या मांगी है।
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विवि का खर्च
शिक्षण पर 1 करोड़, वेतन पर 2.10 करोड़, केवीके पर 1.30 करोड़, कृषि फार्म पर खर्च 10 लाख रुपये।
यह बड़ी लापरवाही
एफसी सतेंद्र कुमार का कहना है कि बिल के भुगतान में देरी पर जांच बैठा दी गई है। यह बड़ी लापरवाही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद वीसी को सौंपी जाएगी।
खास बात
- 4.50 करोड़ का खर्च है एक माह का कृषि विवि का
- 1050 रुपये का मोबाइल का बिल जमा नहीं हुआ वीसी का
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