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विकास विभाग पर बोझ बने 8 विभाग

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- विकास विभाग के अधीन नहीं आते हैं ये विभाग, फिर भी भवन पर काबिज
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- इन विभागों में पूरे दिन चलते हैं एसी, कूलर और पंखे
- बाकी विभागाें ने चुकाया बिल पर इन्होंने नहीं दिया 15 लाख का बिल

मेरठ। आठ विभाग ऐसे हैं जिनका अपना दफ्तर नहीं पर वे विकास भवन में अपना डेरा जमाए हैं। धुआंधार ढंग से यहां चल रहे एसी की विकास भवन पर ऐसी मार पड़ी है कि वह बकाएदार बन गया है। इन विभागों ने बिजली तो खूब इस्तेमाल की पर उसका 15 लाख रुपये से ज्यादा का बिल जमा ही नहीं किया। अब विद्युत विभाग के अधिकारी तत्काल इसके जमा करने की बात कह रहे हैं तो अधिकारी भी इस तरफ गंभीरता दिखा रहे हैं।
कलक्ट्रेट परिसर स्थित विकास भवन में आठ विभाग ऐसे काबिज हैं, जो विकास विभाग के अधीन ही नहीं आते हैं। बावजूद इनका यहां न केवल पूरा वर्चस्व है बल्कि इन विभागों में दिल खोलकर बिजली खर्च की जा रही है। इनके अधिकारी और कर्मचारियों के कार्यालय यहां हैं तो बिजली भी विकास भवन के विद्युत कनेक्शन से प्रयोग कर रहे हैं। इन विभागों के अंधाधुंध विद्युत प्रयोग के कारण विकास भवन पर 15 लाख रुपये का बिल बकाया हो चुका है। विकास भवन परिसर तीन मंजिला बना है। जिसमें विकास विभाग के अधीन आने वाले तमाम विभाग हैं। इसके अलावा कृषि, मत्स्य, पंचायत राज, समाज कल्याण, विकलांग कल्याण, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक कल्याण और भूमि संरक्षण विभाग के कार्यालय भी खुले हैं। इन विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों के दफ्तर विकास भवन में मौजूद हैं।
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विकास भवन के नाम से एक कनेक्शन
विकास भवन में सिर्फ एक ही विद्युत कनेक्शन है, जो विकास विभाग के नाम से है। इस कनेक्शन से तमाम विभागों के अधिकारियों और उनके कर्मचारियों के कार्यालयों में विद्युत सप्लाई होती है। तमाम विभागों के अधिकारियों के दफ्तरों में एसी लगे हुए हैं तो कर्मचारियों के कार्यालयों में कूलर, पंखों के साथ दिन में भी लाइटें जलती हैं और कंप्यूटर आदि संचालित होते हैं। सबसे ज्यादा बिल एसी चलाने से आ रहा है।
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पचास हजार से डेढ लाख तक बकाया
इस समय विकास भवन पर विद्युत बिल का करीब 15 लाख रुपये बकाया है। इसमें विकास विभाग अपना बिल भुगतान पूरा कर चुका है, लेकिन अन्य विभागों पर पचास हजार से डेढ़ लाख रुपये तक के बिल बकाया हैं। इन सभी विभागों का बिल कार्यालयों में लगाये गये सब मीटर से तैयार होता है। बावजूद इसके कई विभागों ने बिजली बिल का पैसा ही जमा नहीं किया है। इन सभी विभागों का तत्काल बिल जमा करने को कहा गया है। दरअसल पिछले इसी तरह से बकाया बढ़ने पर विकास भवन का कनेक्शन काट दिया गया है। ऐसे में इस बार विभागों को कहा है कि यह नौबत नहीं आनी चाहिए।

वर्जप
मैं अभी बाहर हूं। पूरे मामले को समझने के बाद ही कुछ कहना संभव होगा। वापस आते ही पूरी जानकारी जुटाई जाएगी - आर्यका अखौरी, मुख्य विकास अधिकारी
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