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यूपी बोर्ड मूल्यांकन: मेरठ मंडल के 149 स्कूलों ने नहीं अपलोड किए आंतरिक अंक, परिणाम पर असर की आशंका

Tue, 31 Mar 2026 11:02 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

यूपी बोर्ड की 2026 की परीक्षा के लिए मेरठ मंडल के 149 स्कूलों ने अभी तक आंतरिक अंक अपलोड नहीं किए हैं। इससे बोर्ड परिणाम तैयार करने में परेशानी आ सकती है। परिषद ने छह अप्रैल तक अंतिम मौका दिया है।

 

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जीआईसी में यूपी बोर्ड की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करते परीक्षक। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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यूपी बोर्ड की वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं का मूल्यांकन कार्य अंतिम चरण में पहुंच गया है, लेकिन मेरठ मंडल के कई विद्यालयों ने अभी तक आंतरिक अंक अपलोड नहीं किए हैं। इससे बोर्ड परीक्षा परिणाम तैयार करने में परेशानी आ सकती है।

क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय के अनुसार मेरठ मंडल के अंतर्गत आने वाले 17 जिलों के 149 विद्यालयों ने हाईस्कूल की आंतरिक परीक्षा तथा इंटरमीडिएट के नैतिक शिक्षा, योग, खेल और शारीरिक शिक्षा के अंक अब तक परिषद की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए हैं।

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प्रदेश में 866 विद्यालयों के अंक लंबित
प्रदेश के 52 जिलों में कुल 866 विद्यालय ऐसे हैं जिन्होंने अभी तक आंतरिक अंक अपलोड नहीं किए हैं। इसके कारण अंक अपलोड न होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या 97 हजार 603 तक पहुंच गई है।

हालांकि मेरठ जिले का कोई भी विद्यालय इस सूची में शामिल नहीं है और यहां सभी विद्यालयों ने अपने अंक अपलोड कर दिए हैं।

मूल्यांकन कार्य अंतिम चरण में
यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होकर 12 मार्च तक चली थीं। इसके बाद 18 मार्च से उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य शुरू किया गया था। मूल्यांकन कार्य की अंतिम तिथि एक अप्रैल निर्धारित की गई है।विद्यालयों को अंक अपलोड करने के लिए 25 मार्च तक का समय दिया गया था, लेकिन कई विद्यालयों ने तय समय सीमा के भीतर अंक अपलोड नहीं किए।

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छह अप्रैल तक अंतिम मौका
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने विद्यालयों को अंक अपलोड करने के लिए अंतिम अवसर देते हुए छह अप्रैल तक का समय दिया है।

क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय के सचिव ज्योति प्रसाद ने स्पष्ट कहा कि परिषद की ओर से यह अंतिम अवसर है। इसके बाद अंक अपलोड करने का मौका नहीं मिलेगा। यदि किसी विद्यालय की ओर से अंक अपलोड नहीं किए जाते हैं तो उसके लिए संबंधित प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक जिम्मेदार होंगे। 

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