कोठों पर सेक्स वर्करों का आना-जाना जारी
- हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी मेरठ पुलिस गंभीर नहीं
- ब्रह्मपुरी थाने की पुलिस ने निरीक्षण के नाम पर की खानापूर्ति
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। रेडलाइट एरिया में सेक्स वर्करों का आना-जाना जारी है। बुधवार को कई सेक्स वर्कर कोठों पर पहुंचीं। एक कोठा संचालिका ने कोठे पर पुराना ताला हटाकर नया ताला लगाया। उसका वीडियो स्थानीय लोगों ने बना लिया। वहीं, हाईकोर्ट के फटकार के बाद भी मेरठ पुलिस गंभीर नहीं है। ब्रह्मपुरी थाने की पुलिस ने मंगलवार को महज निरीक्षण के नाम पर खानापूर्ति की है।
झूठा हलफनामा प्रस्तुत करने के मामले में पुलिस-प्रशासन की हाईकोर्ट में काफी किरकिरी हो गई। इसके बाद भी मेरठ पुलिस की नींद नहीं टूट रही। मंगलवार को पुलिस अधिकारियों ने दावा किया था कि बुधवार से अभियान चलाकर कोठों की तलाशी ली जाएगी। सेक्स वर्करों का रेस्क्यू होगा। लेकिन बुधवार को ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ। खानापूर्ति के लिए एसएसआई ब्रह्मपुरी ऊधमसिंह तालान, दरोगा संजीव कुमार और पांच पुलिसकर्मी रेडलाइट एरिया में पहुंचे। 10 मिनट में रेडलाइट एरिया में घूमकर वापस चले गए। जबकि रेडलाइट एरिया में बुधवार को भी सेक्स वर्करों का कोठों पर आना-जाना लगा रहा। कई सेक्स वर्कर तो बाजार में घूमती दिखाई दीं। जिनको निगरानी करने वाले किसी पुलिसकर्मी ने नहीं देखा।
रिक्शा से आई, ताला बदला और चली गई
रेडलाइट एरिया में एक कोठा संचालिका रिक्शा से आई। अपने कोठे के गेट का ताला खोला, ऊपरी मंजिल पर गई व फिर नया दूसरा ताला लगा दिया। यह नजारा बाजार के कई लोगों ने देखा। इसी दौरान एक व्यापारी ने कोठा संचालिका का वीडियो बना लिया। जिसमें महिला रिक्शा से आती और ताला बदलकर चली जाती है।
पुलिस के दावे खोखले, खानापूर्ति
पुलिस अधिकारियों के दावे भी खोखले हैं। अधिकारियों ने दावा किया था रेडलाइट एरिया को बंद कराया जाएगा। सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। पुलिस भी गश्त करती रहेगी, लेकिन 24 घंटे में ही यह दावे ध्वस्त हो गए। बुधवार को पुलिस ने न अभियान चलाया और न ही सीसीटीवी कैमरे के लिए जांच की। कोठों पर कार्रवाई के मामले में पुलिस महज खानापूर्ति मेें जुटी है।
कोठों पर सेक्स वर्कर मौजूद
पुलिस दावा करती कि कोठों पर ताले लगे हैं और सेक्स वर्कर वहां से चली गईं। जबकि स्थानीय लोग कहते हैं कि कोठों पर सेक्स वर्कर मौजूद हैं। कई सेक्स वर्कर कोठा संचालिकाओं के घरों पर दूसरी जगह शिफ्ट हो गईं। पुलिस सिर्फ यहां खानापूर्ति कर रही है। कोठों पर जाकर किसी ने अभी तक तलाशी तक नहीं ली। बाजारों में इसको लेकर अलग-अलग चर्चाएं भी हैं।
कैसे खाली होंगे 25 कोठे
पुलिस कहती है कि 75 कोठों में से 25 कोठों पर सेक्स वर्करों का मालिकाना हक है। उनको कैसे खाली किया जा सकता है। कोठों पर उनके परिवार भी रहते है। इन्हें कैसे वहां से भगाया जा सकता है। लेकिन सवाल उठता है कि इस कोठों पर निगरानी तो हो सकती है, लेकिन पुलिस इसको भी नहीं कर रही है।