- मेरठ रोडवेज रीजन से 74 बसें भेजी गईं, कुल 235 बसें जानी हैं ड्यूटी में
- बुलंदशहर की बसें नहीं मिलने से बेहाल रहे यात्री, शिकायत पर भी समाधान नहीं
मेरठ।
चुनाव ड्यूटी में गई रोडवेज बसों का असर यात्रियों पर दिखाई देने लगा है। आधा दर्जन से ज्यादा रूटों पर बसों की कमी है। मंगलवार को बुलंदशहर रूट की बसें नहीं मिलने पर यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी। यात्रियों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।
अगले चरणों में होने वाले चुनाव के लिए पुलिस फोर्स और मतदान कर्मियों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए मेरठ रोडवेज रीजन से 235 बसें मांगी गई हैं। इसमें मेरठ डिपो से 80, सोहराबगेट डिपो से 80, गढ़मुक्तेश्वर डिपो से 35 और बड़ौत डिपो से 40 बसें शामिल हैं। अब तक कुल 74 बसों को भेजा जा चुका है। इसमें मेरठ डिपो से 31, सोहराबगेट डिपो से 12, गढ़मुक्तेश्वर डिपो से 8 और बड़ौत डिपो से 23 बसें भेजी गई हैं। 74 बसें रूटों से हटने के बाद ही परेशानी बढ़ने लगी है। दिल्ली, बुलंदशहर, बिजनौर, गढ़मुक्तेश्वर, शामली और बड़ौत आदि रूटों पर बसों की कमी होने लगी है। मांगी गई सभी बसें जाने पर यह परेशानी और भी ज्यादा होगी।
सोमवार को सोहराबगेट बस अड्डे पर शाम को बुलंदशहर रूट की बस नहीं मिलने पर यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। यात्रियों ने पूछताछ केंद्र पर बस की जानकारी की, लेकिन यहां से कोई समाधान नहीं हो सका। करीब एक घंटे बाद बस मिलने पर यात्री गंतव्य की ओर रवाना हो सके। यही हाल दिल्ली, शामली, बिजनौर आदि रूटों पर भी रहा। बसें कम होने से उनमें यात्रियों की निर्धारित संख्या से अधिक यात्री दिखाई दिए। आरएम नीरज सक्सेना का कहना है कि चुनाव ड्यूटी के लिए मेरठ रीजन से 235 बसों की मांग की गई है। इसमें से 75 बसें भेजी जा चुकी है। 161 बसें और जानी है। जिन रूटों से बसें कम हुई वहां थोड़ी परेशानी हो रही है। बसों के जाम में फंसने पर भी यात्रियों को इंतजार करना पड़ता है। उपलब्ध बसों के ट्रिप बढ़ाकर समस्या का समाधान कराया जा रहा है।