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बिना टेंडर काम कराने पर डीपीओ के खिलाफ बैठी जांच

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- मंडलायुक्त ने सीडीओ को सौंपी जांच, कई मामलों में है गंभीर आरोप
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अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। जिला प्रोबेशन अधिकारी के खिलाफ मंडलायुक्त ने एक तरफ जहां बिना टेंडर लाखों रुपये के काम कराने की शिकायत पर जांच बैठा दी है। वहीं शासन से लगातार उनका ट्रांसफर होने के बाद भी रिलीव न करने को लेकर पत्र आ रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन उन्हें रिलीव नहीं कर पा रहा है।
जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रवण कुमार गुप्ता आला अधिकारियों पर भारी पड़ रहे हैं। बाल संप्रेक्षण गृह में एक बालक के साथ हुए दुष्कर्म के मामले सहित कई अन्य मामलों को लेकर उनकी नकारात्मक रिपोर्ट शासन को भेजी जा चुकी है। प्रशासनिक आधार पर उनका 5 दिसंबर 2018 को झांसी तबादला भी हो चुका है, लेकिन वह आज तक रिलीव नहीं हुए। अब रजबन छोटा बाजार निवासी समीर ने कमिश्नर को शिकायती पत्र दिया था। इसमें उन्होंने जिला प्रोबेशन अधिकारी पर आरोप लगाया कि उनकी संस्था जिला प्रोबेशन कार्यालय में रजिस्टर्ड है और उनके टेंडर विभाग द्वारा स्वीकृत थे। इसके तहत वह खाद्य पदार्थ सप्लाई करते थे। इसके साथ ही दो अन्य संस्थाओं के भी टेंडर स्वीकृत थे जो अन्य सामान सप्लाई करते थे, लेकिन जिला प्रोबेशन अधिकारी ने अचानक उनके टेंडर निरस्त कर दिए और बिना रजिस्टर्ड ठेकेदार को टेंडर दे दिया।
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बिना टेंडर एक करोड़ का करा रहे कार्य
वहीं जिला प्रोबेशन अधिकारी पर आरोप है कि बाल संप्रेक्षण गृह में करीब एक करोड़ रुपये से निर्माण कार्य कराये जा रहे हैं, लेकिन इसका भी कोई टेंडर नहीं निकाला गया। यह काम भी किसी रजिर्स्टड संस्था से नहीं कराया जा रहा है। इस पूरे मामले पर मंडलायुक्त अनीता सी मेश्राम ने मुख्य विकास अधिकारी को जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। वहीं दूसरी ओर मंडलायुक्त को एक पत्र निदेशक महिला कल्याण सी इंदुमती ने भी जारी किया है। जिसमें उन्होंने 5 दिसंबर को हुए तबादले के आदेश का पालन कराते हुए श्रवण कुमार गुप्ता को तत्काल रिलीव करने के आदेश जारी किए हैं।
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