माछरा/ मुंडाली। सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ के अधिकारियों की लापरवाही के कारण किसान गन्ना पर्ची के लिये परेशान घूम रहे है अभी तक किसानों की गन्ना पेड़ी भी खेतों मे ही खड़ी है किसानों के मुताबिक इस बार गेहूं की बुआई भी कम हो पाई है।
सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ के अंतर्गत करीब 91 गांव आते हैं। जिनमें ज्यादातर गांव नंगलामल शुगर मिल को ही गन्ना आपूर्ति करते है प्रदेश सरकार ने शुगर मिलों से गन्ना पर्ची जारी करने के अधिकार छीन कर सहकारी गन्ना विकास समितियों को दिये। जिसमें किसान को समय से और बिना भेदभाव के गन्ना पर्ची मिल सके परंतु इस बार सहकारी गन्ना विकास समिति ने गन्ना कलेंडर ही देर से बनाया। कलेंडर में गन्ना पर्चियां लायी गयी उनसे किसान संतुष्ट नहीं हैं। माछरा निवासी प्रमोद कुमार का कहना है कि उनकी 30 गन्ना पर्चियां है परंतु कलेंडर में इस तरह से छापी गयी है 15 दिन के बाद भी गन्ना पर्ची नही आ रही है उनका गन्ना पेड़ी का भी अभी भी खेत में खड़ा है इस बार गेहूं की बुवाई भी कम हुई है किसान नेता तथा कृषक अमित गुर्जर का कहना है कि गन्ना पर्ची के लिए किसान भटक रहे परंतु गन्ना पर्ची नहीं मिल रही हैं। किसान की सुनने वाला नही है किसान मनोज शर्मा गोविंदपुरी निवासी कृषक का कहना है कि अभी गन्ना पेड़ी खेत में है जबकि जनवरी तक पेड़ी का गन्ना खत्म हो जाना चाहिए था। राधना निवासी कृषक इरफान चौधरी का कहना है कि गन्ना पर्ची के अभाव में कोल्हू पर गन्ना डालना पड़ रहा है। गन्ना समिति में जो कर्मचारी है शिकायत करने पर केवल आश्वासन देते हैं। ब्रजेश शर्मा, दीपक काजला, संजय शर्मा, ऋषि प्रधान लोटी, आदि किसानों का कहना है कि समिति से अच्छा होता कि शुगर मिल से ही गन्ना पर्ची जारी करें। क्योकि सहकारी गन्ना विकास समिति मेरठ का कार्यालय भी मेरठ में स्थित है जोकि दूर है एक बार समिति जाने में पूरा दिन ही खराब हो जाता है गन्ना समिति सचिव रामनरेश शर्मा का कहना है कि शुगर मिल द्वारा जो इंडेंट जारी किया जाता है उसी के अनुरूप गन्ना पर्चियां जारी की जाती है।