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57 लाख की जमीन पर खेल कर ले लिया 24 करोड़ का ऋण

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जमीन 57 लाख की, ले उड़े 24.50 करोड़ का ऋण
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मेरठ। प्रदेश सरकार भले ही राजस्व बढ़ाने पर जोर दे रही हो। लेकिन सरकारी तंत्र की साठगांठ से बिल्डर्स और भूमाफिया की मिलीभगत से बड़ा खेल किया जा रहा है। इसी तरह का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें दिल्ली रोड़ पर व्यावसायिक उपयोग की 6110 वर्ग गज भूमि को कृषि भूमि दर्शाकर पहले स्टांप चोरी की गई और फिर उसे उसकी वैल्यू व्यावसायिक कीमत से लगवाकर 57 लाख की इस जमीन पर 24.50 करोड़ का ऋण ले लिया। मुख्यमंत्री दरबार में शिकायत पहुंचने के बाद इस प्रकरण की गोपनीय जांच शुरू हो गई है।
यह की गई शिकायत
बागपत गेट पत्ता मोहल्ला निवासी सुशील लोधी ने मुख्यमंत्री व संस्थागत वित्त विभाग के बड़े अधिकारियों को भेजी शिकायत में पूरा प्रकरण बताया। इसके अनुसार एमडीए की मेजर ध्यानचंद नगर कालोनी की 40 फुट चौड़ी सड़क पर व्यावसायिक उपयोग की खसरा नंबर 15/4 व 16 की कुल 6110 वर्ग गज भूमि के दो बैनामे कृषि भूमि दर्शाकर 7 अप्रैल 2012 व 9 सितंबर 2013 को हुए थे। यह रजिस्ट्री नाथ एग्रीकल्चरल फार्म्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम हुई थी। जबकि इसी जमीन पर 11 अक्तूबर 2013 को महादेव इंटरप्राइजेज दाल मंडी मेरठ के नाम इसी खसरा नंबर से लगी जमीन का जो एग्रीमेंट हुआ, वह व्यावसायिक दर पर 7500 रुपये प्रति वर्ग गज की दर से तय किया गया था। जबकि नाथ एग्रीकल्चरल को जो रजिस्ट्री की गयी वह जमीन 40 फीट चौड़े रास्ते पर थी, तो महादेव इंटरप्राइजेज की जमीन मात्र 8 फुट की चकरोड ही थी।
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बड़ा हुआ खेल
महादेव इंटरप्राइजेज और नाथ एग्रीकल्चरल के हुए एग्रीमेंट और रजिस्ट्री को देखें तो बड़ा खेल हुआ। क्योंकि नाथ एग्रीकल्चरल ने यह जमीन राजस्व विभाग की साठगांठ से कृषि भूमि की दर से करीब 56.80 लाख रुपये में खरीदी। जबकि इस जमीन की कीमत वास्तव में पांच करोड़ रुपये के आसपास बैठती है। इस पर स्टांप शुल्क भी 8 प्रतिशत की दर से करीब 40 लाख रुपये बैठता है। जबकि जिस दर से यह जमीन खरीदी गयी उसके आधार पर करीब साढ़े चार लाख रुपये का ही स्टांप शुल्क प्रदान किया गया। ऐसे में सीधे सीधे रजिस्ट्री विभाग को 35 लाख रुपये से ज्यादा का चूना लगा दिया।
रजिस्ट्री विभाग भी जांच के घेरे में
इस पूरे खेल में रजिस्ट्री विभाग की भूमि जांच के घेरे में आ गयी है। क्योंकि इतनी बड़ी जमीन की रजिस्ट्री के बाद रजिस्ट्री विभाग अपने माध्यम से जांच कराकर जमीन का आकलन कराता है। संस्थागत वित्त विभाग के निर्देशों के अनुसार सभी बड़े बैनामों की मौके पर जांच करने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाती है। लेकिन साठगांठ के खेल में यहां सब रजिस्ट्रार कार्यालय के अधिकारी मौके पर गए ही नहीं। यदि वह मौके पर जाते तो पूरा मामला तभी खुल सकता था।
आयकर विभाग को भी लगाया चूना
जमीन की रजिस्ट्री कराने वाले ने इस जमीन को साठगांठ से सस्ती दर पर खरीदे जाने से जहां रजिस्ट्री विभाग को चूना लगाया। वहीं आयकर विभाग को भी चूना लगाया। वरना इस जमीन की कुल कीमत का हिसाब उक्त जमीन मालिक को देना पड़ता, जिस पर आयकर तय होता।
तीन बार में लिया करोड़ों का ऋण
बिल्डर ने व्यावसायिक उपयोग की जिस भूमि को 7 अप्रैल 2012 व 9 सितम्बर 2013 में कुल 56.80 लाख रुपये में खरीदा, पांच माह बाद ही 24 जनवरी 2014 को मेरठ विकास प्राधिकरण से फर्जी वैल्यूएशन रिपोर्ट तैयार कराने की मंशा से एक पत्र प्राप्त किया और 6110 वर्ग गज भूमि की कुल कीमत 15 करोड़ दर्शाते हुए टाटा कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसीज लिमिटेड से 11 करोड़ का ऋण प्राप्त कर लिया और इसी भूमि पर वर्ष 2015 में 8 करोड़ का ऋण दोबारा ले लिया। यह खेल यहीं नहीं रुका। अगले साल 2016 में इसी जमीन पर फिर से 5.50 करोड़ रुपये का कर्ज और लिया गया। इस तरह 56 लाख 80 हजार रुपये में खरीदी गई भूमि पर जमीन मालिक के खाते में 24.50 करोड़ रुपये पहुंच गए।
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प्रकरण की जांच होगी
मामला अभी मेरे संज्ञान में नहीं आया है। लेकिन यदि ऐसा है तो बहुत ही गंभीर मामला है। प्रकरण सामने आते ही इसकी निष्पक्ष और गंभीरता से जांच होगी। जो भी दोषी होंगे उन पर समुचित कार्रवाई तय होगी। -आनंद कुमार, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)

खास बातें:
6110 वर्ग गज भूमि का उपयोग बदलकर हो गए रातोंरात करोड़पति
35 लाख का भी लगाया सरकारी खजाने को स्टांप चोरी कर चूना
- सरकारी तंत्र की साठगांठ से बिल्डर्स और भूमाफिया की मिलीभगत
- औद्योगिक क्षेत्र मेजर ध्यानचंद नगर में व्यावसायिक जमीन को खेती की बताकर खरीदा
- मुख्यमंत्री के दरबार में शिकायत पहुंचने पर चल रही गुपचुप जांच
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