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जिला पंचायत बोर्ड बैठक्

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हैंडपंप और शिलापट को लेकर जूझे सदस्य
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मेरठ।
विकास भवन सभागार में आयोजित जिला पंचायत बोर्ड की बैठक में वर्तमान वित्तीय वर्ष के बजट सहित तमाम प्रस्ताव बिना किसी अवरोध के स्वीकृत हो गए। एक प्रस्ताव पर जरूर जिला पंचायत सदस्य सतपाल सिंह ने आपत्ति लगाते हुए सुझाव दिया, लेकिन विभागीय योजना के प्रस्ताव के कारण उसे खारिज कर दिया गया। वहीं दूसरी तरफ पूरी बैठक में सदस्य अपने अपने क्षेत्र में पेयजल व्यवस्था के साथ ही अपने अधिकारों को लेकर सवालों के बीच नाराजगी जताते नजर आए।
बैठक में अधिकांश सदस्यों ने जिला पंचायत निधि से विधायकों के प्रस्तावों पर होने वाले विकास कार्यों पर आपत्ति जताने के साथ ही शिलापट उनके नाम का न लगाने की मांग रखी। बैठक शुरू होते ही एएमए प्रदीप कुमार सक्सेना ने 24 अक्तूबर 2017 को हुई पिछली बैठक की कार्रवाई पढ़ी। इसके बाद बैठक के एजेंडे पर चर्चा हुई। जिसमें माछरा ब्लॉक के ग्राम कासमपुर में जिला पंचायत की 6830 वर्ग मीटर जमीन पर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा सद्भावना मंडप बनाने पर चर्चा हुई। इस प्रस्ताव पर जिला पंचायत सदस्य ठा. सतपाल सिंह ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि इस भूखंड पर स्टेडियम बनाया जाए। लेकिन एएमए ने स्टेडियम के लिए युवा कल्याण विभाग के माध्यम से प्रस्ताव देने के लिए कहा। हालांकि किठौर विधायक सत्यवीर त्यागी ने भी जिला पंचायत सदस्य सतपाल सिंह के प्रस्ताव का समर्थन किया।
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पेयजल का छाया मुद्दा
जिला पंचायत सदस्यों ने कहा कि 80 प्रतिशत हैंडपंप खराब हैं। सदस्य जीतेंद्र सिंह ने कहा कि जिला पंचायत सदस्य के क्षेत्र में जो निधि दी जाती है, उससे हैंडपंप लगवाये जाएं। इस पर एएमए ने कहा कि शासनादेश के अनुसार जिला पंचायत की निधि को दूसरे विभाग में हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है। क्योंकि हैंडपंप लगाने के लिए यह धनराशि जल निगम को देनी होगी। इस पर तमाम सदस्यों ने विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष कुलविंदर सिंह ने कहा कि हम शासन को प्रस्ताव भेजेंगे, जिसमें जिला पंचायत सदस्यों को अपने अपने क्षेत्र में 20-20 हैंड पंप का कोटा दिया जाए, या फिर निधि के माध्यम से वह हैंडपंप लगवा सकें। इसी दौरान कुछ सदस्यों ने कहा कि कई गांवों में पानी की टंकी दो साल से बनी खड़ी हैं, लेकिन अभी तक आपूर्ति चालू नहीं हुई है। इसे लेकर भी काफी देर हंगामा रहा।


शिलापट पर सदस्य का नाम हो
बैठक में सदस्यों ने कहा कि सांसद और विधायक की शासन से निधि आवंटित होती है। ऐसे में जिला पंचायत निधि से उनके प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होने चाहिए। यदि होते भी हैं, तो उसमें पहले सदस्यों की सहमति ली जाये और विकास कार्य का जो शिलापट है उस पर जिला पंचायत सदस्य का नाम भी दर्ज हो। इस पर विधायक सत्यवीर त्यागी ने आपत्ति दर्ज कराई।

जमीन पर कब्जा नहीं तो नोटिस क्यों
जिला पंचायत सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला ने कहा कि उनके क्षेत्र के वीर सिंह को जिला पंचायत द्वारा जुल्हैड़ा गांव में जमीन ठेके पर दी गई है। जिसका 25 हजार रुपये वह जमा कर चुके हैं। लेकिन ग्रामीणों ने जमीन पर यह कह कर कब्जा नहीं करने दिया कि जमीन ग्राम पंचायत की है। अब जिला पंचायत बाकी बकाए के लिए नोटिस दे रहा है, जो गलत है।

सभी को मिले बराबर का काम
बैठक में सदस्यों ने प्रस्ताव रखा कि विकास कार्यों के लिए जो भी बजट स्वीकृत हो, वह सभी सदस्यों में बराबर वितरित किया जाये। इस पर एक सदस्य ने कहा कि जो सदस्य बैठक में नहीं आये हैं, उनके क्षेत्र का काम दूसरे सदस्यों में वितरित किया जाए।

बिना मानचित्र स्वीकृति के बना लिए भवन
जिला पंचायत सदस्य सपना हुड्डा ने कहा कि उनके क्षेत्र में कई शिक्षण संस्थान चल रहे हैं। जिनके पास न तो मान्यता है और न ही उनके भवन मानचित्र जिला पंचायत से स्वीकृत है। इनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।

स्वच्छ भारत मिशन पर उठे सवाल
सदस्यों ने कहा कि ग्राम पंचायतों में सफाई कर्मचारी नियुक्त हैं, लेकिन सफाई नहीं हो रही है। इस पर जिला पंचायत सदस्य रजनी सोम के पति विनोद सोम ने स्वच्छ भारत मिशन को लेकर कटाक्ष कर दिया। जिस पर विधायक सत्यवीर त्यागी ने आपत्ति दर्ज कराई।

डीपीआरओ नहीं कर रहे कार्रवाई
जिला पंचायत सदस्य विक्की तनेजा ने डीपीआरओ पर आरोप लगाया कि उनके क्षेत्र के एक गांव में तैनात ग्राम विकास अधिकारी भ्रष्टाचार कर रहा है, जिसकी कई माह से शिकायत कर रहे हैं। लेकिन डीपीआरओ कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। डीपीआरओ आलोक शर्मा ने कहा कि कार्रवाई एक प्रक्रिया के तहत होती है, जो चल रही है। इस पर सदस्योें ने डीपीआरओ को खरी खोटी सुनाई।

बजट हुआ स्वीकृत, टैक्स बढ़ा
बैठक में वित्तीय वर्ष 2018-19 का बजट स्वीकृत किया गया। जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में इस बार आय और व्यय का बजट करीब पांच करोड़ बढ़ाकर रखा गया है। बजट में पिछले साल के अवशेष, शासन से राज्य वित्तीय आयोग से प्राप्त धनराशि के साथ ही अन्य आय के स्रोतों से अनुमानित 49,33,68,917 रुपये की आय प्रस्तावित की गई है, जबकि करीब 33, 21,50,000 रुपये के व्यय का बजट रखा गया है। इसके साथ ही जिला पंचायत के अधीन आने वाले छोटे बड़े तमाम उद्योगों के लाइसेंस शुल्क को जहां एक समान किया गया है। वहीं ईंट भट्ठों सहित अन्य प्रतिष्ठानों व मानचित्र स्वीकृति आदि का शुल्क व टैक्स बढ़ाया गया है।

आपत्ति के बावजूद बैठे रहे बाहरी लोग
जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में अध्यक्ष कुलविंदर सिंह के पिता मुखिया गुर्जर, जिपं सदस्य रजनी सोम के पति ठा. विनोद सोम सहित करीब 30-40 बाहरी युवक मौजूद रहे। इस पर सदस्य डॉ. मीनाक्षी भराला ने आपत्ति जतायी, लेकिन सभी बैठे रहे। इस दौरान विनोद सोम ने जहां विचार भी रखे तो मुखिया गुर्जर भी सक्रिय नजर आए।
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ये रहे मौजूद
सांसद राजेंद्र अग्रवाल, जिला पंचायत सदस्य नितिन खटीक, रीना, मुकेश चरला, हेमा, सुबोध गुर्जर, बबीता टेहरकी, रजनी सोम, अंजू तालियान, हेमलता, सुमन भदौड़ा, रोहताश पहलवान, रविंद्र टीकरी, शफीक, तनु, शमशाद, कृष्णा, अनुज वाल्मीकि, तरुण कुमार, डॉ. मनोज अधाना, ब्लॉक प्रमुख जानी अनिल कुमार, दौराला सचिन अहलावत, रजपुरा योगेंद्र, मवाना प्रेम सिंह, मेरठ नितिन कसाना और सरूरपुर हरेंद्र कुमार मौजूद रहे।
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