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दरोगा और सिपाही को पांच साल की कैद

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मेरठ। छह हजार रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में पकड़े गए सिपाही और दरोगा को स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम इरफान कमर ने दोषी पाते हुए पांच वर्ष का कारावास व प्रत्येक को एक-एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा से दंडित किया है। मामला बुलंदशहर जिले का करीब 16 साल पुराना है।
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अभियोजन पक्ष के अनुसार बुलंदशहर के एसडीएम सदर कैप्टन प्रभांशु कुमार द्वारा गुलावठी थाने में आठ अक्तूबर 2002 को रिपोर्ट दर्ज करायी गई थी। जिसमें बताया गया कि उन्होंने पुलिस के साथ कुंवरपाल पुत्र शौराज सिंह के घर पर दबिश दी तो वहां मौजूद दरोगा प्रेमकुमार द्विवेदी व सिपाही पवनकुमार थाना भौमोरा, जिला बरेली की तलाशी के दौरान पवन कुमार के पास से छह हजार रुपये बरामद हुए। इन नोटों पर सीओ व एसडीएम सदर ने हस्ताक्षर किए थे।
पूछताछ में सिपाही ने बताया कि ये रुपये दरोगा प्रेमकुमार द्विवेदी के कहने पर अजयपाल सिंह पुत्र शौराज सिंह ने दिए है। दरोगा प्रेमकुमार ने बताया कि भमौरी बरेली में दर्ज हत्या के मुकदमे से कुंवरपाल पुत्र शौराज का नाम निकालने के ये रुपये लिए हैं। जिस पर दोनों को रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इस मामले में सीओ जगदीश सिंह, एसओ गुलावठी विश्वजीत सिंह, दरोगा टीपी सिंह सहित अनेक पुलिस वाले मौजूद रहे। दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई।
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न्यायालय में सरकारी वकील मौ. यासिर ने एसडीएम प्रभांशु कुमार श्रीवास्तव, जगदीश सिंह, अजय पाल सिंह, कुंवरपाल सहित अनेक गवाह पेश किए। जिनके बयानो के आधार पर स्पेशल जज भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम इरफान कमर ने आरोपी दरोगा प्रेमकुमार द्विवेदी व सिपाही पवन कुमार सजा सुनाई।
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