मेरठ। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडवानी गायिका तीजनबाई बुधवार को दो दिन के प्रवास के लिए साकेत स्थित होटल में पहुंची। लंबे समय बाद मेरठ में युवाओं को पंडवानी के सुरों से रूबरू कराने के लिए पद्मभूषण और पद्मश्री प्राप्त पंडवानी गायिका तीजनबाई आई हैं।
बृहस्पतिवार को तीजनबाई चावली देवी आर्य कन्या इंटर कॉलेज में और शुक्रवार को विद्या ग्लोबल स्कूल बागपत रोड, एमपीजीएस शास्त्रीनगर में प्रस्तुति देंगी। अमर उजाला से बातचीत में तीजनबाई ने पंडवानी के भूत, वर्तमान व भविष्य पर प्रकाश डाला। पांडवों की वाणी के नाम से मशहूर पंडवानी में तीजनबाई महज 13 साल की आयु से शामिल हैं। देश ही नहीं विदेशों में पांडवों की शौर्य गाथा का बखान कर चुकी तीजनबाई इन दिनों कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ सुर सजा रही हैं। उन्होंने कहा कि बदलते वक्त में हमें भी बदलना होगा। देश में और भी तीजनबाई आएं इसलिए मैंने पंडवानी को ही जरिया बनाया। तीजनबाई पंडवानी के माध्यम से लोगों को बेटी बचाओ का संदेश दे रही हैं। भविष्य की पंडवानी गायिका के रूप में अपनी शिष्या कोलकाता की सीमा मित्रा को देखती हैं। उन्होंने बताया कि 216 शिष्य मुझसे पंडवानी गायन सीख रहे हैं, लेकिन सीमा मित्रा पर मुझे अधिक भरोसा है। मेरी 71 साल की आयु हो चुकी है, लेकिन सभी रसों का मिश्रण कर प्रस्तुति को और प्रभावी बनाने की पुरजोर कोशिश करती हूं।
मेरठ तो मुझे हमेशा से प्रिय है
पंडवानी गायिका तीजन बाई ने कह कि मेरठ मुझे हमेशा ही प्रिय रहा है। 2008 में दीवान स्कूल में ही यहां प्रस्तुति देने आई थी। पहले भी दो बार आ चुकी हूं, इस बार पुन: मुझे कैराना घराने के संगीत दिग्गजों की धरती मेरठ को नमन करने का अवसर मिला है। मैं यहां आकर खुश हूं।
यह है पंडवानी
पंडवानी छत्तीसगढ़ राज्य का एकल नाट्य है। इसका अर्थ है पांडववाणी अर्थात महाभारत की कथा। तीजनबाई ने आज के संदर्भ में पंडवानी को देश के साथ विदेशों में ख्याति दिलाई।