राजकीय निर्माण निगम की आवासीय योजना में हुए 125 करोड़ रुपये के घोटाले पर डीएम ने जांच बैठा दी है। जांच कमेटी में तीन अधिकारियों को शामिल किया है। जांच टीम 15 दिन में रिपोर्ट डीएम को सौंपेगी। माना जा रहा है कि सूबे में घोटाले का बड़ा खुलासा हो सकता है। वहीं, कई लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।
बता दें कि पूर्व में बसपा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा गरीबों के लिए आवास योजना शुरू की गई थी। उसी समय से योजना को भ्रष्टाचार की दीमक लग गयी थी। यह दीमक सपा सरकार के कार्यकाल में भी मिले सरकारी धन को चाटती रही। यूपी में योगी सरकार आते ही पुरानी सभी योजनाओं पर जांच बैठी तो जिला प्रशासन ने राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों से 425 करोड़ की योजना में खर्च धन और भवनों का रिकार्ड मांग लिया। जिला प्रशासन के पत्रों को निर्माण निगम के अधिकारियों ने रद्दी की टोकरी दिखा दी।
पूरे मामले को अमर उजाला ने बुधवार के अंक में उजागर किया। इसके बाद अधिकारियों की कुंभकर्णीं नींद टूटी। इस पर शासन ने भी संज्ञान लिया है। इसके बाद डीएम समीर वर्मा ने फिर से रुड़की में बैठे राजकीय निर्माण निगम के अधिकारियों से संपर्क साधने का प्रयास किया, लेकिन वे अनसुनी करते रहे। अब डीएम ने शासन के निर्देश पर 425 करोड़ की आवास योजना पर जांच बैठा दी है। जांच टीम में एसडीएम सदर, आवास विकास के सहायक अभियंता देवेन्द्र प्रताप और नगर निगम के जूनियर इंजीनियर एसपी सिंह को शामिल किया है।
15 दिन में पूरी करनी होगी जांच
डीएम द्वारा गठित जांच टीम को 15 दिन में रिपोर्ट सौंपनी है। टीम को राजकीय निर्माण निगम से 425 करोड़ रुपये का हिसाब लेना होगा। वहीं, बनाए गए मकानों की स्थिति और संख्या का ब्योरा भी शामिल करना होगा। इसी आधार पर घोटाले का उजागर होना निश्चित है।
माया सरकार में शुरू हुई थी योजना
बसपा सरकार के कार्यकाल 2009 में महानगरों में गरीबों के लिए आवास बनाने की योजना शुरू की गई थी। मलिन बस्तियों में रहने वाले लोग जिनके सिर पर छत नहीं थी अथवा मकान जर्जर थे। खासकर बीपीएल को मकान बनाकर दिए जाने थे। लगातार आठ वर्षों से गरीबों के हितों को भ्रष्टाचार की दीमक चाट रही है। मकानों में कहीं खिड़की तो कहीं दरवाजे नहीं हैं। निर्माण सामग्री इतनी घटिया इस्तेमाल की गई कि पांच-छह साल में ही भवन जर्जर स्थिति में हैं।
मुख्य बातें
डीएम ने जिला प्रशासन, आवास विकास और नगर निगम अधिकारियों को किया जांच टीम में शामिल
15 दिन में सौंपनी होगी जांच रिपोर्ट
उप्र राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी नहीं उठा रहे प्रशासनिक अधिकारियों के फोन