अमर उजाला ब्यूरो
माछरा। हसनपुर कलां में मां कालका देवी के मंदिर परिसर में दो दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। वहीं, माछरा में माता रानी के मठ पर एक दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर प्रसाद चढ़ाकर मन्नतें मांगी।
मेरठ-गढ़ मार्ग स्थित हसनपुर कलां में रछौती मार्ग पर जंगल के बीचोंबीच प्राचीन कालका मां का मंदिर स्थित है। जिस पर राजस्थान, दिल्ली, गुड़गांव तथा स्थानीय गांव रछोती, डेरियो, गोहरा, माछरा, नंगली अब्दुल्ला, कासमपुर, बहरोड़ा, नंगली किठौर, शोल्दा, अमरपुर, अट्टा, भटीपुरा, मऊखास, नंगलामल, गोविंदपुरी, रहदरा, पसवाड़ा, स्वामीपुरा, जिसोरा, जिसोरी आदि के श्रद्धालु मां के मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रसाद चढ़ाते हैं। वहीं, पीपल की टहनियों पर कलावा बांधते हैं। वे मन्नतें पूरी हो जाने पर कलावा खोलते हैं। मंदिर कमेटी के सदस्य कर्मवीर उर्फ लाला, मुकेश प्रधान ने बताया कि मेले में बच्चों के खेल का सामान झूला, सौंदर्य प्रसाधन आदि की दुकानें लगती हैं। यह भजन कीर्तन की अलग से मंडली रहती है। दूसरे दिन मेले का समापन किया गया। रामनवमी भी होने के कारण भंडारे का आयोजन हसनपुर कलां में बिजलीघर स्थित मंदिर में किया गया। इस दौरान कर्मवीर लाला, मुकेश प्रधान, नेता सत्यवीर खटाना, प्रवीण, आदेश, पप्पू ठेकेदार, तुरन्तनाथ महाराज, नीलम प्रधान, नरेश कुमार, आदि रहे।
उधर, माछरा स्थित माता रानी के मठ पर एक दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। मठ के पुजारी सोनू प्रजापति पुत्र ताराचंद प्रजापति ने बताया कि प्रत्येक वर्ष चैत्र मास की अष्ठमी को एक दिवसीय मेले का आयोजन किया जाता है। जिस पर माछरा, नंगली अब्दुल्ला, कासमपुर, स्वामीपुरा आदि के पुरुष, महिलाएं प्रसाद व पंजी आदि चढ़ाकर मन्नतें मांगते हैं। उनकी मुरादें पूरी होती हैं।