धरने, आंदोलन तो बहुत हुए पर पदयात्रा पहली है
मेरठ। किसानों, मजदूरों और गरीबों की हक की लड़ाई के लिए भारतीय किसान यूनियन ने धरने और आंदोलन तो बहुत किए, लेकिन उन्होंने पदयात्रा पहली बार की है। हजारों कार्यकर्ताओं के साथ भाकियू पदाधिकारी हरिद्वार से किसान क्रांति पदयात्रा की शुरुआत करते हुए दिल्ली की और बढ़ रहे हैं। इस पदयात्रा में ऐसे भी कार्यकर्ता शामिल हैं जो पिछले 50 साल से महेंद्र सिंह टिकैत से जुड़े रहकर कई बड़े आंदोलनों में भाग ले चुके हैं।
किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक महेंद्र सिंह टिकैत के निधन के बाद भाकियू अपनी ताकत को ओर बढ़ा रही है। किसानों की मांगों को लेकर राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ पिछले तीन दशक से भाकियू ने क ई बड़े धरने देकर सरकारों के खिलाफ आंदोलन किया। पदयात्रा में शामिल मुजफ्फरनगर के सिसौली निवासी विक्रम सिंह ने बताया कि वह 50 साल से महेंद्र सिंह टिकैत से जुड़े थे। अब नरेश टिकैत और राकेश टिकैत किसानों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। उन्हें याद है कि अक्तूबर 1988 में महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों की मांग और गन्ना समर्थन मूल्य को लेकर एक सप्ताह तक धरना दिया। उस समय करीब एक लाख किसान दिल्ली में जुटे थे। सिसौली निवासी वेदपाल सिंह बताते हैं मुजफ्फरनगर के कूरमखेड़ा बिजली घर पर दिया गया धरना आज भी उनके जेहन में ताजा है। उस समय मुख्यमंत्री रहे वीर बहादुर सिंह ने बढ़ाई गई बिजली दर का फैसला वापस कर दिया था।
मुकंदपुर निवासी अरुण प्रधान बताते हैं कि किसानों की लड़ाई में ही उनकी जिंदगी बीत गई। 1988 में मेरठ कमिश्नरी पर एक माह तक हजारों लोगों ने धरना दिया था। अपनी मांगों को लेकर वह कभी पीछे नहीं हटे। जब 1990 में लखनऊ की तरफ भाकियू बढ़ी तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर उन्हें जेल भेज दिया था। किसानों ने कहा कि अब उन्होंने फै सला लिया है कि वह धरना देकर नहीं दिल्ली तक चलकर अपने मांग रखेंगे। इसमें पीछे हटने की कोई बात नहीं है। यह किसान क्रांति पदयात्रा तीन दिन में दिल्ली पहुंचेगी।