मेरठ। रालोद ने लोकसभा चुनाव 2019 की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी प्रदेश सरकार को घेरने और वोटरों को अपने पाले में करने के लिए आगामी 13 जुलाई से ‘पोल खोल, धावा बोल’ कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। इस कार्यक्रम के तहत न केवल बिजली की बढ़ी दरों के खिलाफ लोगों को लामबंद किया जाएगा बल्कि जयंत चौधरी पचास से ज्यादा गांवों में पहुंचकर जनसंपर्क करेंगे। कार्यक्रम की शुरुआत आगरा से होगी।
वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के बाद रालोद का सियासी गठजोड़ (जाट-मुसलमान) को बड़ा झटका लगा था। गठजोड़ टूटने से रालोद न तो लोकसभा चुनाव 2014 में कोई सीट जीत सका था और न ही विधानसभा चुनाव 2017 में भी छपरौली विधानसभा सीट ही बचा पाया था। हालांकि यहां से जीते सहंदर रमाला भी भाजपा के साथ जा चुके हैं। लेकिन लंबे समय से सियासी वनवास झेल रही पार्टी को कैराना लोकसभा उपचुनाव से उस समय संजीवनी मिली जब सपा-बसपा और कांग्रेस के साथ गठबंधन में यह सीट रालोद के हिस्से आ गई। पार्टी हाईकमान ने रणनीति के साथ बेगम तबस्सुम हसन को पार्टी ज्वाइन कराकर टिकट थमा दिया। यह रणनीति कारगर साबित हुई और बिखरे हुए जाट-मुस्लिम गठजोड़ ने भरपूर वोट देकर तबस्सुम को जिताकर पार्टी में जान फूंक दी।
इसके बाद से उत्साहित रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह और उपाध्यक्ष जयंत चौधरी प्रदेश सरकार को घेरने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने दे रहे हैं। अब पार्टी ने ग्रामीण बिजली दरों की बढ़ोतरी को मुद्दा बनाकर पोल खोल, धावा बोल कार्यक्रम के सहारे सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। इसकी शुरुआत जयंत चौधरी आगामी 13 जुलाई को आगरा से करने जा रहे हैं। पार्टी के प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. राजकुमार सांगवान ने बताया कि जयंत चौधरी एक महीने तक पश्चिम के सभी जिलों में पहुंचकर आंदोलन को धार देंगे और रात्रि विश्राम भी करेंगे। पोल खोल, धावा बोल कार्यक्रम 12 अगस्त तक चलेगा। तब तक सरकार ने बढ़ी बिजली दरें वापस नहीं ली तो इसके बाद सभी बिजलीघरों का घेराव की तालाबंदी की जाएगी।