मेरठ। बीओटी ठेकों का विरोध भी शांत नहीं हुआ है। हालांकि शुक्रवार को नगर निगम प्रशासन ने बीओटी ठेकों की पत्रावली कमिश्नर को सौंप दी है। अब देखना यह है कि कमिश्नर पत्रावली पर क्या निर्णय लेते हैं। अगर ठेकों को निरस्त किया जाता है तो बीओटी ठेके ई-टेंडरिंग से होंगे। साथ ही निगम का राजस्व भी बढ़ेगा।
नगर निगम ने मई 2013 में हीरा एडवरटाइजिंग को 17 चौराहे और अभिनव इंटरप्राइजेज को छह मुख्य मार्ग बीओटी पर दिए थे। दोनों पक्षों के बीच शर्तों के साथ अनुबंध किया गया था। अनुबंध में जहां मार्गों पर डिवाइडर, स्ट्रीट लाइट के खंभों आदि की रंगाई पुताई करना निर्धारित किया गया था, वहीं लाइटों को जलाने बुझाने का काम भी ठेकेदार को करना था। इसी प्रकार चौराहों पर ट्रैफिक लाइटों का रखरखाव और रंगाई पुताई करने का काम दिया गया था। अनुबंध की शर्त में यह भी है कि अगर कंपनियों का कार्य पूरे पांच साल संतोषजनक रहता है तो बीओटी ठेका आगे पांच साल के लिए बढ़ाया जा सकता है।
निगम के अनुबंध की शर्तों का भले ही पांच साल अनुपालन न किया गया हो। लेकिन निगम प्रशासन ने दोनों बीओटी कंपनियों के कार्य संतोषजनक होने की रिपोर्ट जारी करके ठेकों का आगामी पांच साल के लिए नवीनीकरण कर दिया, जिसका विरोध शुरू हो गया। अन्य होर्डिंग कारोबारियों ने तो बीओटी ठेेके की बोली पांच करोड़ रुपये वार्षिक पर लगाने तक की घोषणा कर दी। यही नहीं नगर निगम में एक करोड़ रुपये का ब्लैंक चैक भी दिए जाने की बात कही।
कमिश्नर से लगातार बीओटी ठेके के गलत तरीके से नवीनीकरण करने के आरोप लगाते हुए ठेका निरस्त करने की मांग की जा रही है। जिस पर कमिश्नर डॉ. प्रभात कुमार ने नगरायुक्त से बीओटी ठेके की पत्रावली मांगी थी। निगम प्रशासन की तरफ से शुक्रवार को बीओटी ठेकों की पत्रावली कमिश्नर कार्यालय भेजी गयी। हालांकि अभी कमिश्नर ने कोई निर्णय नहीं लिया है।
- कमिश्नर से लगातार हो रही बीओटी ठेके की शिकायत