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सभी केंद्रों के ध्यानार्थ......... राष्ट्रोदय

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हर गांव में शाखाओं को ले जाना ‘राष्ट्रोदय’ का उद्देश्य
मेरठ। आरएसएस का सबसे बड़ा स्वयं सेवक समागम आज (25 फरवरी) मेरठ के जागृति विहार एक्सटेंशन में हो रहा है। इस विशाल आयोजन के पीछे आखिर संघ का क्या उद्देश्य है और कहां से ये विचार आया। ऐसे ही कई सवालों के जवाब तलाशने के लिए अमर उजाला ने आरएसएस के पूर्व प्रांत संघ चालक सूर्य प्रकाश टांक और प्रांत प्रचार प्रमुख अजय मित्तल से वार्ता हुई। दोनों ने ही कार्यक्रम को लेकर संघ की सोच और उसके उद्देश्य के साथ कई सवालों के जवाब दिए। इस बातचीत में निकलकर आया कि राष्ट्रोदय का उद्देश्य शाखाओं को हर गांव तक ले जाना है।

शाखा की दृष्टि से मेरठ प्रांत को बनाएंगे अव्वल : सूर्य प्रकाश टांक
सवाल: राष्ट्रोदय को लेकर सोच क्यों और कैसे बनी?
सूर्य प्रकाश : प्रत्येक छह माह में स्वयं सेवकों की अखिल भारतीय बैठक होती है। इसमें सभी प्रांतोें से स्वयं सेवक आते हैं। हम भी वहां गये थे। तब केंद्रीय नेतृत्व ने विषय रखा कि प्रत्येक न्याय पंचायत स्तर तक शाखाओं का विस्तार होना चाहिए। वहां बताया गया कि केरल प्रांत देश का सबसे ज्यादा शाखा वाला प्रांत है, जबकि मेरठ प्रांत दूसरे नंबर पर है। तभी हमने प्रण कर लिया कि मेरठ प्रांत को शाखा के स्तर पर नंबर एक बनाना है।
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सवाल: राष्ट्रोदय के जरिये कहीं राजनैतिक हित तो साधने का प्रयास नहीं है?
सूर्यप्रकाश : संघ सिर्फ राष्ट्रीयता और सामाजिक सोच को लेकर चलता है। कहीं भी उसका कोई कार्यक्रम या सोच राजनीति से प्रेरित नहीं है। यह आयोजन भी प्रचार-प्रसार के साथ संघ की सोच का ज्यादा विस्तार करने के लिए हो रहा है।
सवाल: क्या इतने बड़े आयोजन से आने वाली परेशानियों पर ध्यान दिया गया?
सूर्यप्रकाश : जब कार्यक्रम पर मंथन हुआ तो तमाम पहलुओं पर विचार हुआ। लेकिन संघ के स्वयं सेवकों के अनुशासन और समर्पण को देखते हुए कार्यक्रम तय कर दिया गया।
सवाल: क्या इस कार्यक्रम को अब इसलिए कराया जा रहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार है?
सूर्यप्रकाश : ऐसा नहीं है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि कोई भी आयोजन करने से पहले माहौल और परिस्थिति को भांपा जाता है। जो अब अनुकूल है, इसलिए आयोजन हो रहा है।

तीन साल में ढाई गुना बढ़ीं शाखाएं : अजय मित्तल
सवाल: राष्ट्रोदय मेरठ प्रांत में ही क्यों हो रहा है?
अजय मित्तल : मेरठ प्रांत पहला ऐसा प्रांत है, जहां पर लगभग सभी न्याय पंचायत स्तर पर शाखाएं लग रही हैं। तीन साल पहले 987 ग्राम सभाओं में शाखाएं लगती थीं, जो अब 2500 तक पहुंच गई हैं। जबकि मेरठ प्रांत में 10580 ग्राम पंचायतें आती हैं। ऐसे में हमारा उद्देश्य है कि इन शाखाओं को ज्यादा से ज्यादा गांवों तक ले जाकर विस्तार किया जाए।
सवाल: मेरठ प्रांत में शाखाओं की स्थिति क्या है?
अजय मित्तल : केरल प्रांत हमसे ऊपर है, जहां पर 4500 शाखाएं लगती हैं। जबकि मेरठ प्रांत देश मे दूसरे नंबर है। यहां पर 3500 शाखाएं लगती हैं। जब 1998 में स्वयं सेवक समागम हुआ था तब मेरठ प्रांत में मात्र 1200 शाखाएं लगती थीं, जबकि इसमें उत्तराखंड भी शामिल था। लेकिन अब यह 3500 हो चुकी हैं। इन शाखाओं के जरिये स्वयं सेवकों की संख्या के साथ राष्ट्रीय एकता व समरसता को बढ़ावा देना है।
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सवाल: इतने बड़े आयोजन पर खर्च भी बहुत हो रहा है? इस धन का स्रोत क्या है?
अजय मित्तल : हमने राष्ट्रोदय के लिए ऑनलाइन पंजीकरण किये हैं, जो 3.14 लाख हुए हैं। प्रत्येक पंजीकरण पर 50-50 रुपये स्वयं सेवकों से लिए गए हैं। इस तरह पंजीकरण से 1.57 करोड़ रुपये इकट्ठा हुआ है। इस पैसे से कार्यक्रम स्थल पर मंच, साउंड, लाइट, बैरीकेंटिंग, पंडाल आदि की व्यवस्था हो रही है। मैदान में कुछ काम मजदूरी पर हुआ तो बहुत काम स्वयं सेवकों ने किया। भोजन की व्यवस्था आम जनता द्वारा कराई जा रही है। इसके अलावा भी लोग अपने स्तर से सहयोग कर रहे हैं।
सवाल: इस समय केंद्र और प्रदेश में भाजपा की सरकार है। क्या इसी कारण राष्ट्रोदय हो रहा है?
अजय मित्तल: ऐसा नहीं है। लेकिन सबसे बड़ा विषय कानून व्यवस्था का होता है, जो इस समय अनुकूल है। इसके चलते राष्ट्रोय कराने में कोई परेशानी नहीं है।

खास बातें
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व प्रांत संघ चालक और प्रांत प्रचार प्रमुख से अमर उजाला ने की वार्ता
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