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निगम बोर्ड चलाने में महापौर को छूटेंगे पसीने

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मेरठ। शहर की सरकार चलाने के लिए महापौर सुनीता वर्मा के सामने कई चुनौतियां हैं। नगर निगम सरकार की नीतियों का विरोध करने के लिए जहां विपक्ष कोई कसर नहीं छोड़ेगा, वहीं कुछ ऐसे विवाद भी हैं, जो बोर्ड बैठक में परंपरागत रूप से चले आ रहे हैं। ऐसे में महापौर को सधे अंदाज में सदन चलाना होगा।
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केंद्र और उप्र में भाजपा की सरकार है। जब-जब प्रदेश और निगम में अलग-अलग दलों की सरकार रही हैं, तब-तब महापौर का कार्यकाल संकट में गुजरा है। यानी नगरायुक्त और महापौर के बीच विवाद रहना और विपक्ष का विरोध झेलना आम बात है। वर्तमान की ही बात करें तो केंद्र और यूपी में भाजपा की सरकार है। जबकि महापौर बसपा से चुनकर आया है। कई ऐसे प्रस्ताव और मसले हो सकते हैं, जिन पर असहमति बन सकती हैं।
यह भी माना जाता है कि नगरायुक्त राज्य सरकार के इशारे पर कार्य करते हैं। जिसका असर शहर के विकास पर पड़ता है। अगर हम नगर निगम बोर्ड संचालन की बात करें तो बगैर नगरायुक्त और विपक्ष के सहयोग के सदन चलना संभव नहीं है। मेरठ महापौर की कुर्सी भाजपा के हाथों से चली जाने के कारण उप्र सरकार में भी हलचल है। इसी से अंदाजा लगाया जा रहा है कि महापौर सुनीता वर्मा को नगर निगम का बोर्ड चलाने के लिए हर कदम पर कांटों से गुजरना होगा।
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वंदेमातरम का विरोध रहता है सुर्खियों में
निगम के बदले राजनैतिक परिदृश्य से माना जा रहा है कि सदन का शुभारंभ वंदेमातरम से नहीं होगा। अगर ऐसा होता है तो नगर निगम के भाजपा पार्षद इसका जमकर विरोध करेंगे। वंदेमातरम को लेकर पूर्व में भी मुस्लिम पार्षद विरोध करते रहे हैं। यह एक ऐसा मुद्दा है जो प्रत्येक बोर्ड बैठकों में सुर्खियों में रहा है। वहीं यह भी एक महत्वपूर्ण सवाल है कि अगर महापौर के साथ पति या अन्य कोई बाहरी व्यक्ति बोर्ड बैठक में घुसा तो घमासान होगा। निगम बैठकों में मुस्लिम महिला पार्षदों की गैर मौजूदगी भी विवाद और परेशानी का कारण बन सकती है।
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खास बातें:
- महापौर सुनीता वर्मा के लिए चुनौती होगा शहर की सरकार चलाना
- मुस्लिम महिला पार्षदों की गैर मौजूदगी भी बन सकती परेशानी
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