मेरठ। लोहा व्यापारी सुनील प्रकाश गर्ग के तीनों हत्यारोपियों ने जहां मंगलवार दिन भर पुलिस के पसीने छुड़ाए रखे तो रात भर हवालात में चीखते रहे। एक हत्यारोपी हार्ट अटैक आने का शोर मचाता रहा तो दूसरे को चाकू से काफी जगह कट लगे हुए थे। तीसरा दिव्यांग आरोपी बाहर निकालने को लेकर चिल्लाता रहा। पुलिस इस डर से कि कहीं किसी की हालत न बिगड़ जाए, उनकी खातिरदारी करती रही। बुधवार को तीनों को जेल भेजकर अपना पीछा छुड़ाया।
देवीनगर सूरजकुंड निवासी सुनील गर्ग की हत्या में पुलिस ने तांबा फैक्ट्री मालिक बसंत कुमार, आशु उर्फ हनी और दिव्यांग नौकर सुशील कुमार को गिरफ्तार किया था। मंगलवार को पुलिस ने प्रेसवार्ता के बाद तीनों आरोपियों को जेल भेजने की बात कही। लेकिन सच्चाई यह रही कि तीनों आरोपियों को बुधवार को जेल भेजा गया।
प्रेस वार्ता में ही बिगड़ गई थी हालत
मुख्य हत्यारोपी बसंत की हालत मंगलवार को प्रेस वार्ता के दौरान ही बिगड़ गई थी। एसएसपी ने सिविल लाइन पुलिस को फटकार लगाते हुए कहा था कि क्या इन्हें कुछ खाने को नहीं दिया। एसएसपी ने बसंत को पानी पिलवाकर प्रेेसवार्ता से भेजा था। जिसके बाद पुलिस ने बसंत को जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार दिलाया। इसके बाद पुलिस तीनों आरोपियों को थाना सिविल लाइन ले गई और मेहमाननवाजी में लगी रही। बुधवार शाम तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
रात भर हवालात में हंगामा
पुलिस ने बताया कि आरोपी बसंत की हालत पहले से खराब थी। वहीं व्यापारी को धारदार हथियार से गोदते समय हत्यारोपी आशु भी घायल हो गया था। जबकि दिव्यांग सुशील भी तबियत खराब बताता रहा। तीनों हत्यारोपी मंगलवार रात भर सिविल लाइन थाने की हवालात में चीखते चिल्लाते रहे। पुलिस को डर था कि किसी आरोपी की हालत ज्यादा खराब न हो जाए। इसको लेकर रात में कई बार पुलिस ने उनको चाय नाश्ता कराया।
तीनों हत्यारोपी कर रहे थे नाटक
एसपी सिटी मान सिंह चौहान के अनुसार वारदात के दौरान आरोपी आशु के हाथ में चाकू लगा था। बसंत और दिव्यांग सुशील भी बीमारी का नाटक कर रहा था। तीनों आरोपियों की हालत देखते हुए मंगलवार को कोर्ट में पेश नहीं किया था। बुधवार को लिखापढ़ी के बाद उनको कोर्ट में पेश किया, जहां से वह जेल गए।
लोहा व्यापारी हत्याकांड
- तीनों हत्यारोपी करते रहे ड्रामा, मंगलवार रात भर हवालात में चिल्लाते रहे
- बुधवार सुबह तीनों को जेल भेजकर सिविल लाइन पुलिस ने पीछा छुड़ाया