मेरठ। ब्रिटिश इतिहासकारों ने भारतीय इतिहास के तथ्यों को तोड़कर अपनी सुविधानुसार लिखा है, जबकि नासा की विभिन्न रिपोर्ट ही भारतीय धर्मग्रंथों की एतिहासिकता व प्राचीनता को प्रमाणित करती हैं। यह विचार सीसीएसयू के इतिहास विभाग में आयोजित कार्यशाला में वक्ताओं ने रखे।
विवि के इतिहास विभाग में चल रही दस दिवसीय कार्यशाला में रविवार को शुभारंभ विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर आराधना ने किया। मुख्य वक्ता केआर मंगलम गुरुग्राम विवि के प्रो. रविप्रकाश ने मार्क्सवादी विचारधारा की खामियां बताईं। उन्होंने भारतीय इतिहास के गौरवपूर्ण युग का विस्तार से वर्णन किया। भारतीयों को इतिहास व इतिहास लेखन से अपरिचित नहीं रहना चाहिए। अंग्रेजों ने भारत में जाति व्यवस्था को जटिल व राजनीतिक विषय बनाया। 1857 की क्रांति को मार्क्सवादी इतिहास सिर्फ एक सिपाही विद्रोह माना। इतिहासकार विनेट स्मिथ ने कौटिल्य द्वारा रचित अर्थशास्त्र ग्रंथ को कठोर बताया, जबकि देश नहीं विश्व की राजनीति का आधार यही ग्रंथ है। गलत इतिहास लाइलाज कैंसर है। इसका उपचार जरूरी है। इतिहासकार में आशा, कुछ करने का जज्बा ये चीजें अवश्य होनी चाहिए, ताकि उसके तथ्य भावी पीढ़ी को गुमराह न कर पाएं। राकेश आर्य ने कहा कि भारतीय इतिहास विश्व का सर्वाधिक प्राचीन इतिहास है। नासा की तमाम रिपोर्ट में पृथ्वी, सूर्य की जो आयु की गणना बताई गई है, वह हमारे धार्मिक ग्रंथों में पहले से ही मौजूद है। तीन अ व्यक्ति के जन्मजात शत्रु हैं। अज्ञानता, अत्याचार व अभाव। नासा की वैज्ञानिक हमारी यज्ञ प्रणाली पर शोध कर रहे हैं। कार्यशाला का संचालन शुचि ने किया। अशोक त्रिपाठी, मुकेश पाल, किरण कुमार, कोमल, मोनिका, अमित, रोहित, कमलकांत, लोकेश, विकास व कालूराम ने सहयोग दिया।