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मांग से कम बिजली से गहराया संकट

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- कुरुक्षेत्र स्थित पावर ग्रिड से बंद हो गई यूपी को मिल रही 1200 मेगावाट की आपूर्ति, अन्य जगह से मिल रही 500 मेगावाट वह भी बंद
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- प्रदेश के साथ साथ पश्चिमी यूपी में भी पड़ रहा प्रभाव
- गांवों से लेकर शहरों तक प्रभावित हुई आपूर्ति
- इधर कांवड यात्रा के कारण बढ़ गई है विद्युत की मांग

मेरठ। एक तरफ जहां कांवड़ यात्रा के मद्देनजर विद्युत की मांग काफी बढ़ गई तो वहीं दूसरी तरफ इसके विपरीत आपूर्ति कम हो गई है। नतीजा, कांवड़ शिविरों में पसीने छूट गए हैं। साथ ही अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च भी ज्यादा आ रहा है।
पावर ग्रिड कारपोरेशन की चंपा कुरुक्षेत्र लाइन के ट्रिप हो जाने से वेस्टर्न रीजन से नार्दन रीजन में आपूर्ति प्रभावित हो गई है। इसके चलते यूपीपीसीएल द्वारा द्विपक्षीय अनुबंध के अंतर्गत की गई विद्युत व्यवस्था में 1200 मेगावाट की कटौती हो रही है। पीवीवीएनएल के एमडी अभिषेक प्रकाश ने बताया कि इसके अलावा केंद्र सरकार की जल विद्युत परियोजनाओं नाफथा, झाकरी और करछम वांग्च्यू आदि में सिल्ट आ जाने से प्रदेश में 500 मेगावाट बिजली नहीं मिल पा रही है। 1700 मेगावाट बिजली कम मिलने से संकट गहरा गया है। पश्चिमांचल को भी मांग के सापेक्ष करीब एक हजार मेगावाट बिजली कम मिल रही है। इसके चलते गांवों से लेकर शहरों तक कट का झटका लगा रहा है। कांवड़ यात्रा को देखते हुए मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, बागपत आदि जिलों के ट्रांसमिशन को भरपूर आपूर्ति करने की मांग कंट्रोल से की गई है।
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बुधवार को लगे बिजली के झटके
बुधवार को बेगमपुल, लिसाड़ी गेट, लिसाड़ी रोड, लेडीज पार्क, नौचंदी, शारदा रोड, पुराना आरटीओ, सोफीपुर, एमईएस, मेडिकल, मलियाना, वेदव्यासपुरी, गंगानगर, पल्लवपुरम आदि बिजलीघरों पर दो से तीन घंटे के झटके लगे हैं। इसके अलावा गांवों में भी 18 घंटे बिजली आपूर्ति रोस्टर प्रभावित हो गया है।
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बढ़ गया खर्च
मेरठ की बात करें तो यहां इस समय कांवड़ यात्रा चरम पर है। सड़कों पर कांवड़ियों का सैलाब उमड़ रहा है। जगह जगह शिविर लग रहे हैं। इसके अलावा मंदिरों पर जलाभिषेक की तैयारियां की जा रही हैं। सुरक्षा व्यवस्था के इंतजाम में पूरी ताकत लगाई जा रही है। बिजली आपूर्ति बाधित होने से इन सब व्यवस्थाओं में बाधा आ रही है। जनरेटर का अतिरिक्त खर्च बढ़ गया है।
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