केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर में 44 हजार ने कराए रजिस्ट्रेशन
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर में वेस्ट यूपी और उत्तराखंड के 44 हजार 707 व्यापारी रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। इनमें से सात हजार 874 व्यापारी अब तक जीएसटी में माइग्रेट भी हो चुके हैं।
केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर के उपायुक्त मंजूनाथ ने बताया कि सोमवार और मंगलवार में 240 नए व्यापारी रजिस्ट्रेशन क रा चुके हैं। व्यापारियों की सुविधा के लिए हेल्प डेस्क पर 32 लोगों की टीम लगाई गई है। हेल्प डेस्क पर व्यापारियों की शिकायतों का निस्तारण और सवालों के जवाब दिए जा रहे हैं। बुधवार को पूछा गया कि क्या व्यापारी को ऑडिट की पूर्व सूचना दी जाएगी और इसे कितने दिनों में पूरा करना होगा। जवाब दिया गया कि ऑडिट प्रारंभ करने से कम से कम 15 दिन पूर्व इसकी सूचना दी जाएगी। इसके अलावा जीएसटी में कर निर्धारण कितने वर्षों में हो सकेगा। जवाब दिया गया कि सामान्य मामलों में वार्षिक रिटर्न दाखिल करने के तीन वर्षों के अंदर आदेश पारित करना होगा। फ्रॉड और टर्नओवर छिपाने के मामले में यह सीमा पांच साल होगी। जीएसटी के निर्यातकों को क्या सुविधा उपलब्ध होगी। जवाब दिया गया कि निर्यात पर करदेयता शून्य होगी। लेकिन पूर्व खरीद पर दिए गए कर की आईटीसी अनुमन्य होगी, जो प्रत्येक माह रिफंड की जाएगी।
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जीएसटी का डर, ट्रांसपोर्टर कर रहे माल ले जाने से इंकार
मेरठ। राज्य वस्तु एवं सेवा कर के एडिशनल कमिश्नर वीएन सिन्हा ने बताया कि उनके पास शिकायत आई है कि कुछ ट्रांसपोर्टर सामान ले जाने से इंकार कर रहे हैं। दरअसल, उन्हें डर है कि कहीं जीएसटी उन पर न लग जाए। कई ट्रांसपोर्टरों को यह भ्रम हो रहा है कि जीएसटी उन्हें देना पड़ेगा, जबकि हकीकत यह है कि जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी का माल ले जाने पर उन्हें जीएसटी नहीं देना पड़ेगा। अगर जीएसटी में पंजीकृत व्यापारी किसी अपंजीकृत व्यापारी को भी सामान बेचता है तो भी पंजीकृत व्यापारी इसे वहन करेगा, ट्रांसपोर्टर नहीं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में ट्रांसपोर्टरों को जानकारी दी गई है।
खास बातें
- 7874 हुए जीएसटी में माइग्रेट
- हेल्प डेस्क पर आ रहीं शिकायतें
- कारोबारियों के समस्या सुलझा रही हेल्प डेस्क