मेरठ। शहर की तेरह पार्किंग लावारिस छोड़ दी गई हैं, जिससे नगर निगम को बड़े राजस्व का नुकसान हो रहा है। कई पार्किंग में ठेकेदार वसूली कर रहे हैं, लेकिन यह पैसा निगम की तिजोरी तक नहीं पहुंच रहा है। टेंडर प्रक्रिया में भी निगम पूरी तरह उलझा हुआ है।
घंटाघर स्थित टाउन हॉल की पार्किंग को छोड़कर अन्य पार्किंग से कोई आय नहीं हो रही है। बताया गया है कि नगर निगम का ध्यान गृहकर की वसूली पर केंद्रित रहा, जबकि पार्किंग को उपेक्षित छोड़ दिया गया। शहर में निगम की तेरह बड़ी और पांच छोटी पार्किंग हैं। घंटाघर टाउन हॉल और सूरजकुंड पार्क वाली पार्किंग से पहले करीब दो करोड़ रुपये से अधिक की कमाई होती थी। कुछ अफसरों की लापरवाही के कारण निगम को पार्किंग से पैसा नहीं मिल रहा है। परिणामस्वरूप, तीन-चार स्थानों पर दबंग लोग अवैध रूप से पार्किंग चलाकर वसूली कर रहे हैं।
कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न
लोगों ने निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। संयुक्त व्यापार संघ के अजय गुप्ता ने शिकायत की है कि यदि निगम पार्किंग और किराये की दुकानों पर ध्यान देता तो दस करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होता। राजीव गुप्ता ने कहा कि पार्किंग से वसूली बढ़ाने के लिए निगम ने कोई कार्य नहीं किया है और वे नगर आयुक्त से शिकायत करेंगे। तनुजा निगम ने बताया कि 31 मार्च तक कई पार्किंग अनुबंध के तहत संचालित थीं और जल्द ही सभी पार्किंग का अनुबंध किया जाएगा।