मेरठ। शहर का कूड़ा उठाने ओर नाला सफाई में नगर निगम का डीजल खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। इस साल भी 13 करोड़ रुपये खर्च हो गए, लेकिन शहर के नाले और सफाई की स्थिति बदहाल है। निगम अधिकारियों ने अगले चार साल में इस मद पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है।
नगर निगम शहर की सफाई के बाद कूड़े को उठाने और नालों से निकले कचरे को डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टरों और डंफरों के अलावा डोर टू डोर कूड़ा वाहनों का प्रयोग करता है। इन वाहनों पर निगम का हर साल डीजल खर्च बढ़ता जा रहा है। हाल ही पेश पुनरीक्षित बजट में बताया गया कि इस साल इस मद में निगम का 13 करोड़ रुपया खर्च हो गया है। कार्यकारिणी सदस्यों ने बढ़ते डीजल खर्च को कम करने के लिए डीजल की बजाय सीएनजी चालित वाहनों की खरीद का सुझाव दिया है। इससे जहां शहर का वायु प्रदूषण भी कम होगा और इस मद का व्यय भी घटेगा।
नाले गंदगी से लबालब
कूड़े के नाम पर 13 करोड़ रुपये खर्च होने के बाद भी शहर में जहां सफाई में गुणात्मक सुधार नहीं हो सका हैं। शहर के अधिकतर नाले कचरे से अटे पड़े हैं। नगर निगम का नाला सफाई में 50 फीसदी से ज्यादा संसाधन तो डेयरियों से बहाये जा रहे गोबर को निकालने में लग जाता है। इसके बावजूद निगम अधिकारी डेयरियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। गोबर उठान के लिए डेयरियों से पैसा लेकर निगम की आय भी बढ़ाई जा सकती है।
डीजल खर्च तो होना ही है
शहर से निकलने वाले कूड़े और नालों की सिल्ट आदि को डंपिंग ग्राउंड तक पहुंचाने मेें डीजल खर्च तो होना ही है। डेयरियों से नालों में बहाये जा रहे गोबर का समाधान ढूंढना है। इसके बंद होने से निगम की एक बड़ी समस्या खत्म हो जाएगी। - डॉ. गजेंद्र सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
31 मार्च तक खर्च करने होंगे 20 करोड़
मेरठ। नगर निगम को 14वें वित्त आयोग के बचे 20 करोड़ रुपये खर्च करने में पसीना आ रहा है। यदि ये धनराशि 31 मार्च तक खर्च नहीं की गई तो शासन को वापस चली जाएगी। इसे लेकर निगम अधिकारी पशोपेश में हैं।
नगर निगम को 14वें वित्त आयोग 2014-15 के अंतर्गत पांच साल के अंदर विकास कार्यों के लिए 250 करोड़ रुपये की धनराशि मिली थी। अब इस धनराशि में से करीब 20 करोड़ रुपये शेष हैं। हालांकि निगम अधिकारी कोरोना काल में विकास कार्य कई माह तक ठप होने के चलते तिथि बढ़ाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो एक बड़ी धनराशि शासन के पास चली जाएगी। इसके साथ ही खराब प्रदर्शन के आधार पर 15वें वित्त आयोग की धनराशि पर भी इसका असर पड़ना तय है। ब्यूरो
सिंचाई विभाग ने शुरू की आबू नाले की सफाई
मोदीपुरम। दौराला से वेंक्टेश्वरा तक गंदगी से अटे नाले की सफाई बृहस्पतिवार को शुरू हो गई। हाल ही में एक व्यक्ति ने नाले की सफाई न होने और गंदगी से क्षेत्र में बीमारी फैलने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की थी। आज कैंट विधायक ने भी मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया।
आबू नाले की सफाई 15 साल से नहीं हुई थी। नाला चोक होने के कारण बदबू के कारण आसपास के लोगों को सांस लेने काफी परेशानी हो रही थी। आसपास की कॉलोनियों में बीमारी फैलने की आशंका बनी हुई थी। हाल ही में स्थानीय निवासी रविंद्र कुमार ने नाले की सफाई न होने से आसपास के घरों का पानी दूषित होने की शिकायत मुख्यमंत्री पोर्टल पर की थी। इसके बाद अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और जांच कराई। बृहस्पतिवार से वेंक्टेश्वरा कॉलेज के पास से नाले की सफाई शुरू हो गई। सूचना पर विधायक मौके पर पहुंचे और जानकारी ली। इस मौके पर सुनील शर्मा, पार्षद राजेश खन्ना, निशांक गर्ग, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता आशुतोष सारस्वत, एसडीओ सत्येंद्र, अवर अभियंता पुनीत अग्रवाल मौजूद रहे। संवाद