जिला अस्पताल के डॉक्टर व बाबू विवेचना में शामिल
सिपाही भर्ती में मेडिकल में पकड़ा गया था दलाल ओंकार
पुलिस ने आरोपी बाबू के घर दी दबिश, नहीं लगा सुराग
मेरठ।
यूपी पुलिस सिपाही भर्ती में मेडिकल पास कराने के नाम पर अवैध वसूली करने वाले दलाल के बयान और मोबाइल कॉल डिटेल की साक्ष्य के आधार पर पुलिस ने विवेचना में डॉ. मनीष कुमार और बाबू राजहंस का नाम शामिल किया है। मामले में पुलिस ने आरोपी बाबू की तलाश में दबिश दी, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा।
पुलिस लाइन में सिपाही भर्ती 2018 के लिए 13 अप्रैल से मेडिकल शुरू हुआ था। परतापुर के ढिंडाला गांव निवासी अभ्यर्थी लवी सिंधू ने भर्ती बोर्ड के नोडल अधिकारी संजीव बाजपेई से शिकायत की थी कि एक डॉक्टर ने उसे पर्ची पर मोबाइल नंबर लिखकर दिया था। डॉक्टर ने कहा था कि फोन आएगा, उसे 15 हजार रुपये दे देना। नहीं तो मेडिकल में फेल कर दिया जाएगा। इसके बाद पुलिस ने पीडब्लूडी कार्यालय के पास से दलाल ओंकार को गिरफ्तार किया था।
नोडल अधिकारी संजीव बाजपेई का कहना है कि दलाल ने पूछताछ में बताया कि जिला अस्पताल के बाबू राजहंस के कहने पर यह काम किया था। सिविल लाइन पुलिस ने आरोपी दलाल ओंकार को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया था। इसके बाद भर्ती बोर्ड द्वारा गठित पैनल से डॉ. मनीष को बाहर कर दिया गया और पूछताछ की गई। सिविल लाइन थाने में दर्ज केस की विवेचना सीओ हरिमोहन कर रहे हैं। सीओ का कहना है कि पकड़े गये दलाल ने अपने बयान में जिला अस्पताल के बाबू राजहंस और डॉ. मनीष पर भी आरोप लगाए थे। विवेचना में कॉल डिटेल और मोबाइल की सीडीआर के आधार पर डॉक्टर और बाबू राजहंस के नाम शामिल कर लिए गए हैं। एसपी ट्रैफिक संजीव बाजपेई का कहना है कि आरोपी बाबू पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दबिश दे रही है।