टीबी को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर रही है। यही नहीं लोगों को जागरूक करने के लिए विभिन्न विज्ञापन एवं जागरुकता कार्यशाला से भी जागरूक किया जा रहा है। इसके बावजूद टीबी के मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। पिछले एक सप्ताह से स्वास्थ्य विभाग विश्व क्षय रोग दिवस के रूप में कार्यशाला का आयोजन कर अपने चिकित्सकों को जागरूक कर रहे हैं। वहीं, लोगों को जागरूक करने की सलाह दे रहे हैं।
मार्च में 22 नए मरीज मिले
लगभग 30-40 साल पहले तक टीबी ग्रस्त मरीज जागरुकता एवं उपचार के अभाव में दम तोड़ देते थे। वहीं बाजार में सीमित दवा उपलब्ध थीं। ये महंगी होने के कारण गरीब मरीज अभाव में दम तोड़ देते थे। सरकार ने टीबी से बचाने के लिए डाट्स हर सीएचसी व पीएचसी में उपलब्ध कराए दिए हैं। यहां टीबी की निशुल्क दवा वितरित की जाती है। इसके बावजूद टीबी के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। मवाना सीएचसी पर प्रतिदिन नए टीबी के मरीज आ रहे हैं। फरवरी की बात करें तो लगभग 30 मरीज नए सीएचसी पहुंचे। मार्च में अब तक 22 नए मरीज मिले हैं।
15 से 25 वर्ष तक की लड़कियों में भी लक्षण
मवाना सीएचसी में टीबी के आने वाले मरीजों में अधिकतर 15 से 25 वर्ष की लड़कियां हैं। कम उम्र में लड़कियों में टीबी के लक्षण मिलने से चिकित्सक हैरान हैं। इसके अलावा मवाना क्षेत्र के कई हलवाई भी टीबी से ग्रस्त मिले हैं। इनका इलाज सीएचसी मवाना में चल रहा है। लड़कियों के अतिरिक्त महिलाएं व वृद्ध भी सीएचसी में उपचार करा रहे हैं।
विश्व क्षय रोग दिवस पर किया जागरूक
विश्व क्षय रोग दिवस पर सीएचसी एवं पीएचसी के अतिरिक्त अभियान चलाकर टीबी के बारे में लोगों को जागरूक किया जा रहा है। हर साल सरकार करोड़ों-अरबों रुपये खर्च कर विभिन्न माध्यमों से लोगों को जागरूक कर रही है। इसके बाद भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। जिस कारण सरकार के प्रयासों को पलीता लगता नजर आ रहा है।
ये है कारण
टीबी की बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति यदि कहीं थूक देता है तो दूसरे लोगों को नुकसान पहुंचता है
हलवाइयों में धुएं के कारण टीबी हो जाती है
लिफ्ट में सफर करने वाले व्यक्ति भी टीबी के संक्रमण की चपेट में जल्द आते हैं
शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाने के बाद भी टीबी की बीमारी हो जाती है
यदि किसी व्यक्ति को टीबी है वह अपने परिवार के साथ एक ही कमरे में रहता है तो दूसरे सदस्यों को भी टीबी होने का खतरा रहता है
टीबी का पता लगने पर योग्य चिकित्सक से उपचार न कराना
टीबी का इलाज बीच में छोड़ देना अधिक घातक
मवाना में टीबी के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है। लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है कि बुखार एवं खांसी अधिक दिन रहने पर तुरंत जांच कराएं। यदि लक्षण मिलते हैं तो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तुरंत इलाज शुरू कराएं। -डा. अरुण कुमार, चिकित्सा अधीक्षक, सीएचसी मवाना