गोशालाओं ने नहीं सुधरी व्यवस्था, भूख से तड़प रहे गोवंश
- शनिवार को भी सुबह 11 बजे पहुंचना शुरू हुआ चारा
- एक बजे तक गोवंश को मिला चारा
- बीमार और मरे गोवंश पर भी नहीं दिया जा रहा ध्यान
मेरठ। नगर निगम की गोशालाओं में गोवंश को समय पर चारा, चिकित्सा आदि की सुविधा मिल रही है या नहीं इसकी निगरानी करना निगम अफसर जरूरी नहीं समझ रहे हैं। अफसरों ने ठेकेदरों के हाथों में पूरी व्यवस्था दे दी है, ऐसे में भूख से तड़पते रहते हैं, गोवंश बीमार हो रहे हैं, लेकिन उनकी जांच भी नहीं की जा रही है।
नगर निगम ने सूरजकुंड वाहन डिपो, कांजी हाउस और परतापुर अछरोंडा में अस्थाई गोशाला खोली है। जिसमें सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर बेसहारा घूमने वाले गोवंश को पकड़कर रखा गया है। सभी गोवंश के चारे, पानी, चिकित्सा की जिम्मेदारी नगर निगम की है। नगर निगम अफसरों यह काम ठेकेदारों को देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। आलम यह है कि निगम अफसर गोशालाओं में पहुंचकर यह देखना भी जरूरी नहीं समझ रहे हैं कि यहां मौजूद गोवंश को समय पर चारा पानी और उपचार दिया जा रहा है या नहीं। जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण गोशाला में पशुओं की मौत हो रही है, लेकिन निगम अफसर उनके शवों को भी नहीं उठवा रहे हैं। शुक्रवार को भी गोशालाओं में गोवंशी की अनदेखी के मुद्दे पर पूर्व पार्षद ने खूब हंगामा किया था, लेकिन इसके बाद भी निगम का कोई अफसर व्यवस्था देखने के लिए गोशालाओं में नहीं पहुंचा। जिसके कारण गोशाला संचालित कर रहे ठेकेदार मनमानी कर रहे हैं। शनिवार को सुबह 11 बजे तक गोवंश भूखे रहे। 11 बजे के बाद गोशाला में हरा चारा पहुंचा। उसे बाद ही गाय और सांड़ों को चारा मिलना शुरू हुआ।
तीन बछड़े बीमार, एक की मौत
- सूरजकुंड गोशाला में बछड़ों के बीमार होने और मरने का क्रम लगातार जारी है। पिछले चार दिन से तीन बछड़े बीमार पड़े हैं। जिन्होंने चारा खाना भी बंद कर दिया है। साथ ही एक बछड़ा दो दिन से मरा पड़ा है। जिसका शव भी नहीं उठाया जा रहा है।
चारा मिलना मुश्किल हो रहा है
जिस दिन से मछेरान में बवाल हुआ, उस दिन से शहर में हरा चारा मिलना मुश्किल हो रहा है। इधर उधर से हरे चारे की व्यवस्था की जा रही है। इसी कारण प्रतिदिन गोशाला में देरी से चारा पहुंच रहा है। - उमंग जैन, ठेकेदार।
मेरे मूल अधिकार नहीं दिए जा रहे हैं
मेरे मूल अधिकार दिए नहीं जा रहे हैं। गोशाला संबंधी कार्य के लिए हमारे पास पत्र आया था, लेकिन हमने इस कार्य को करने से इंकार कर दिया था। वैसे भी पशु संबंधित हमें कोई जानकारी नहीं है। कौन अधिकारी गोशाला को देख रहा है। इसके बारे में भी कहा नहीं जा सकता है। - डा. गजेन्द्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी
स्वास्थ्य अधिकारी की जिम्मेदारी
हमें पहले गोशाला का प्रभारी बनाया गया था। लेकिन अब हम प्रभारी नहीं बल्कि जिम्मेदारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी के पास है। गोवंश को चारा नहीं मिल रहा है। इसके संबंध में भी नगर स्वास्थ्य अधिकारी से ही बात की जाए। - राजपाल यादव, सहायक अभियंता, नगर निगम।