नए सिरे से तय होगी इंजीनियरिंग की फीस
मेरठ। इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों की फीस नए सिरे से तय की जाएगी। एआईसीटीई (आल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन) की नई फीस निर्धारण समिति बना रहा है, जो इंजीनियरिंग क ॉलेजों में नया फीस स्ट्रक्चर लागू करेगी। एमआईईटी कॉलेज में आयोजित रोजगार मेले में आए एआईसीटीई के वाइस चेयरमैन डॉ. प्रो.एमपी पूनिया ने कहा हमारा उद्देश्य छात्रों की स्किल व एप्टीट्यूड डेवलप करना है। 2020 से देश में किसी भी कोर ब्रांच कॉलेज को मान्यता नहीं मिलेगी न सीटें बढ़ेंगी। इलेक्ट्रानिक, सिविल और मेकेनिकल इंजीनियरिंग की मान्यता देने और सीटें बढ़ाना रोकेंगे। थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल, मार्केटिंग पर जोर देंगे। युवाओं की समाज के प्रति जिम्मेदारी मजबूत करने के लिए देश के लिए पैकेज प्लान कर रहे हैं। विभिन्न राज्यों की 21 कंपनियों को इसका जिम्मा दिया है। जो इस पैकेज में निवेश करेंगी। देश में 37 लाख सीटें तकनीकी शिक्षण संस्थानों में हैं। उन्होंने कहा कि सीटें खाली रहने का बड़ा कारण दूसरे क्षेत्रों की ओर झुकाव है। केवल इंजीनियर नहीं अब फाइन आर्ट, मेडिकल, फार्मेसी में भी जा रहे हैं इसलिए इंजीनियरिंग में प्रतियोगिता बढ़ी है, 90 प्रतिशत कॉलेज निजी हैं जिनकी फीस बहुत अधिक है। 100 में से केवल 26 छात्र ही महंगी फीस के कारण इन कॉलेजों में ही प्रवेश ले पाते हैं 74 छात्र फीस के कारण प्रवेश नहीं ले पाते।
नए सत्र में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी से स्मार्ट सेंसर की पढ़ाई
नए सत्र से नवाचार के 10 नए कोर्स प्रारंभ कर रहे हैं। सभी कोर्स के लिए करिकुलम निलीट चंडीगढ़ बनाकर 31 जनवरी को दे चुका है। नए पाठ्यक्रमों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स आईओटी, ब्लॉक चैन, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, डाटा साइंसेज, साइबर सिक्योरिटी, थ्रीडी प्रिंटिंग एंड डिजायन,स्मार्ट सेंसर, आब्मेडिड रियलिटी वर्जेस वर्चुअल रियलटी विषय शामिल हैं। इन सबकी पढ़ाई इस वर्ष से तकनीकी शिक्षण संस्थानों में होगी। इसमें माइक्रोसॉफ्ट, टेक महिंद्रा, ओरेकल भारत सरकार का तकनीकी प्रशिक्षण संस्थान निलिट चंडीगढ़ तैयार कर रहा है करिकुरल। इसमें एमटेक प्रोग्राम, बीटेक प्रोग्राम, डिप्लोमा कोर्स होंगे। बीटेक करने वाले छात्रों के लिए इलेक्टिव कोर्स, बारहवीं पास छात्रों के लिए डिप्लोमा कोर्स, शॉर्ट टर्म कोर्स भी रखे हैं। दो से तीन प्रोग्राम मिलाकर बीटेक प्रोग्राम शुरू करने की योजना है। एमबीए व पीजीडीएम प्रोग्राम भी शामिल है। बीकॉम या इंजीनियरिंग करके एमबीए करने वाले छात्रों के लिए इनोवेशन एंटरप्रिन्योरशिप एंड वेंचर प्रोग्राम शुरू हो रहा है। तकनीकी संस्थानों से निकले 7 लाख युवाओं में से कुल 3 लाख युवा ही नौकरी पाते हैं। ऑटोमेशन और मानव श्रम के बीच संतुलन बनाना होगा। पहले जिस काम से 20 लोगों को रोजगार मिलता था अब वो काम 5 से 10 लोग करते हैं। आर्टिफिशियल इटेंलीजेंस के खतरे हैं।
स्वयं से मिलेंगे 20 क्रेडिट
तकनीकी शिक्षा में अब तक किताबी ज्ञान पर जोर था। पहले चार साल में डिग्री लेने के लिए छात्र को 220 क्रेडिट लेने पड़ते थे लेकिन अब एआईसीटीई ने इसे घटाकर 160 कर दिया है। स्वयं पोर्टल पर घर बैठे पढ़ाई करने पर छात्र को 20 क्रेडिट मिलेंगे जिससे कक्षा में बैठकर जो समय जाता है उससे बच सके। छात्र ग्रुप डिस्कशन, आईडिया शेयरिंग, इनोवेशन के विचार विमर्श के लिए कर सकें।
एनबीए से संबद्धता अनिवार्य
कॉलेजों को रेकिंग के लिए नेशनल बोर्ड ऑफ एग्रीडिएशन (एनबीए) से रेकिंग लेना अनिवार्य है। जो कॉलेज एनबीए रेकिंग नहीं लेगी उनकी मान्यता रद्द हो जाएगी। देश में 10,500 में से कुल 500 कॉलेज ही एनबीए से रेकिंग ले पाए हैं। आगामी चार वर्षों में जो कॉलेज एनबीए से रेकिंग नहीं लेंगे उनकी सीटें भी नहीं बढ़ेंगी।
21 दिन तक कोई पढ़ाई नहीं
वाइस चेयरमैन ने कहा इंजीनियरिंग की पढ़ाई को रुचिकर बनाने के लिए इस सत्र से 21 दिन का इंडेक्शन प्रोग्राम चालू किया है। इंजीनियरिंग में प्रवेश लेते ही पहले 21 दिन केवल छात्रों को वातावरण की जानकारी और परिचय देंगे। इंजीनियर बनना तो क्यों बनना है यह बताएंगे, समाज से जोड़ना, है इसके लिए अटल इंडक्शन प्रोग्राम चला रहे हैं।