हौसले से लबरेज... रफ्तार की सिकंदर बेटियां
दीपक भारद्वाज
मेरठ। बेटियों का हर क्षेत्र में जलवा है। घुड़सवारी में भी कम उम्र में आकर वह देश को ओलंपिक में मेडल लाने का सपना संजोए हैं। वे हौसले से लबरेज हैं और रफ्तार पर सवार हैं। दिन-रात घुड़सवारी का अभ्यास कर खुद को ओलंपिक के लिए तैयार कर रही हैं। मेरठ के आरवीसी सेंटर में चल रही रीजनल एक्वेस्टेरियन लीग में लड़कियों ने अपनी घुड़सवारी से लोगों का दिल जीत लिया है। इस लीग में सिविलयंस लड़कियों ने अपना दमखम दिखाते हुए मेडल जीतने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है।
ओलंपिक में मेडल का सपना
14 साल की उम्र में घुड़सवारी की शुरुआत करने वाली ज्योतिका हसन वालिया अब इंटरनेशनल स्तर की घुड़सवारी करती हैं। वह वर्ष- 1996 में जूनियर भारतीय टीम की कप्तान रह चुकी हैं। उत्तराखंड निवासी ज्योतिका ने बताया कि उन्होंने हाल ही में दिसंबर में दिल्ली में आयोजित हुई वर्ल्ड जंपिंग चैंपियनशिप में 130 मीटर की ऊंचाई में घुड़सवारी कर तीसरा स्थान हासिल किया था। अप्रैल-2017 में बेल्जियम में खेली गई इंटरनेशनल प्रतियोगिता में चौथा स्थान हासिल किया। उनके पास नीदरलैंड के दो घोड़े हैं। इनकी देखभाल करने के लिए उन्होंने दो लोगों को रखा है। इन पर हर महीने 70 हजार रुपये खर्च हो जाता है। घोड़ों के लिए वह 800 रुपये प्रति क्विंटल की दूब घास का उपयोग करती हैं। इनके घोड़ों में चिप लगी हुई है। विश्व में किसी भी प्रतियोगिता में जाने पर चिप के माध्यम से इन घोड़ों के नाम का पता चल जाता है। घोड़ों का नाम ‘डिजायर’ और ‘केटरमेन’ है।
अगर मेरे घोड़े चले जाएं तो जीत लूं मेडल
ज्योतिका ने बताया कि अगर यह मेरे घोड़े विदेश में होने वाली प्रतियोगिता में चले जाएं तो में मेडल पर कब्जा कर सकती हूं। लेकिन, वहां इन घोड़ों को लेकर नहीं जा सकती। विदेश में होने वाली प्रतियोगिता के लिए हमें घोड़ों को लीज पर लेना पड़ता है।
नेशनल में गोल्ड पर कब्जा
16 साल की उम्र से घुड़सवारी कर रही मध्यप्रदेश के कटनी निवासी आकांक्षा विश्वकर्मा ने भी अपने हुनर से प्रभावित किया है। नेशनल घुड़सवारी प्रतियोगिता में अभी तक वह एक स्वर्ण पदक और दो रजत पदक जीत चुकी हैं। इस बार भी मेरठ में भाग लेने आईं आकांक्षा ने ड्रेसाज इवेंट के टीम स्पर्धा में कांस्य पदक पर कब्जा किया। अभी उनकी उम्र 18 साल है।
घर में करते थे घुड़सवारी
भोपाल की 13 साल की ज्योति विश्वकर्मा ने बताया कि परिवार में सब लोग घुड़सवारी करते थे। लेकिन, मैंने ठाना है कि देश के लिए इस इवेंट में मेडल लाना है। इसलिए मैंने मध्यप्रदेश एक्वेस्ट्रेरियन एकेडमी में जाकर अभ्यास शुरू किया। अभी तक मैंने कोलकाता में आयोजित हुए नेशनल में कांस्य पदक जीता।
पहले इवेंट में चौथा स्थान
15 साल की उम्र में घुड़सवारी कर रही कंचन राजपूत ने बताया कि पहला इवेंट मेरठ के आरवीसी सेंटर में मंगलवार को हुआ। ड्रेसाज में मैंने चौथा स्थान हासिल किया। पिछले दो साल से घुड़सवारी कर रही हूं। मुझे भरोसा है एक दिन ओलंपिक में तिरंगा जरूर सबसे ऊपर फहराकर ही दम लूंगी।