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एयरफोर्स विमान हादसा-ᄋᄂ₩￧ᅦU￙￰¢₩￙

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तीन साल पहले एयरफोर्स का हिस्सा बना था गरुड़
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बागपत। हादसे का शिकार हुआ माइक्रोलाइट विमान तीन साल पहले एयरफोर्स का हिस्सा बना था और इसे गरुड़ नाम दिया गया था। स्लोवेनियाई कंपनी पिपिस्टेल एयरक्राफ्ट से वायुसेना, नेवी और एनसीसी कैडेटों के प्रशिक्षण के लिए 194 विमानों की खरीद तीन साल पहले की गई थी। हिंडन एयरबेस पर इन विमानों को बतौर प्रशिक्षण प्रयोग में लाया जाता है। यह हल्के हैं और पैराशूट के जरिए इन्हें आसानी से लैंड कराया जा सकता है।
साल 2015 में तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर की अध्यक्षता में इन विमानों की खरीद हुई थी। एयर विंग कैडेटों के प्रशिक्षण के अलावा यह एनसीसी और नौसेना के प्रयोग के लिए महत्वपूर्ण माना गया था। साहसिक खेल गतिविधियों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सबसे तेज हाईविंग प्लेन में शुमार किया जाता है। इस विमान की खास बात यह है कि एक घंटे में यह करीब 250 किमी की उड़ान भर सकता है। वजन कम होने के कारण इसे पैराशूट की मदद से भी लैंड किया जा सकता है।
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हादसे के बाद दूसरा छोटा विमान उतारा गया, जिसमें एक पायलट को मौके से तुरंत ही दूसरे छोटे विमान के जरिए ले जाया गया। इसके बाद एक घंटे बाद वायुसेना का हेलीकॉप्टर पहुंचा। जिसमें सुरक्षा और जांच टीम पहुंची। करीब सात घंटे जांच के बाद विमान के जाने के बाद हेलीकॉप्टर पहुंचा और एयरफोर्स की टीम को लेकर रवाना हो गया। गौरतलब है कि आठ अक्तूबर को वायुसेना दिवस मनाया जाएगा। इन दिनों हिंडन एयरबेस पर इसके लिए फाइनल रिहर्सल चल रही है। इन्हीं तैयारियों के क्रम में यह एयरक्रॉफ्ट रिहर्सल उड़ान पर था।
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एयरफोर्स ने शुरू की विमान क्रैश होने की जांच
बिनौली। टू-सीटर माइक्रो एयरक्राफ्ट हादसे की एयरफोर्स ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। एयरफोर्स के अधिकारियों ने मौके पर करीब एक घंटे तक पड़ताल और पायलट से पूछताछ की। खेतों की फोटो और वीडियोग्राफी कराई गई। एसपी शैलेश पांडेय का कहना है कि एयरफोर्स से जुड़ा मामला है और उन्हीं की टीमें जांच कर रही हैं। डीएम ऋषिरेंद्र कुमार ने बताया कि जांच में वायुसेना की तकनीकी टीमें लगी हैं और स्थानीय पुलिस प्रशासन सुरक्षा और टीम के सहयोग के लिए मौके पर गया था।
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डोलने लगा विमान तो खेत छोड़ सतर्क हो गए किसान
-पायलट गांव की आबादी से दूर खेतों के ऊपर ले गए विमान

अमर उजाला ब्यूरो
बिनौली (बागपत)। समय सुबह करीब सवा नौ बजे। रंछाड़, जिवाना गुलियान और सिरसली गांव के किसान अपने खेतों में व्यस्त थे। एकाएक रंछाड़ गांव के ऊपर विमान डांवाडोल होते दिखा। विमान ने चक्कर लिया और जिवाना गुलियान गेट की तरफ मुड़ गया। किसान गड़बड़ी भांपकर खेतों से बाहर निकले। तब तक विमान का पैराशूट खुल चुका था। देखते ही देखते विमान जमीन की तरफ तेजी से आने लगा। कुछ ही ऊपर रहने पर पायलट खेतों में कूद गए और विमान धमाके के साथ खेत में धंस गया। विमान अगर आबादी के ऊपर गिरता तो हादसा हो सकता था।
रंछाड़ के किसान ओमप्रकाश बताते हैं कि जिस समय हादसा हुआ वह खेतों में कार्य कर रहे थे। विमान ने गांव का चक्कर लिया और जब उसका पैराशूट खोला गया तो उन्हें गड़बड़ लगी थी। कुछ ही मिनट बाद यह जमीन की तरफ बढ़ने लगा। अगर विमान पेड़ से नहीं टकराता तो यह सुरक्षित खेत में उतर सकता था। ऐसा लग रहा था, जैसे पायलट ईंख के खेत की बराबर में खाली पड़े खेत की तरफ इस विमान को ले जाने का प्रयास कर रहे थे। लेकिन यह हादसा हो गया।
किसान रवि तोमर का कहना है कि खेत में उन्हें धमाके की आवाज सुनाई दी। मौके पर पहुंचे तो विमान जमीन में धंसा हुआ था और पायलट उसके पास पहुंच गए थे। पांच मिनट बाद ही दूसरा टू सीटर विमान पहुंचा और एक पायलट को लेकर चला गया। धमाके की आवाज जिसने भी सुनी वह मौके की ओर दौड़ा। विमान अगर आबादी के ऊपर गिरता तो हादसा हो सकता था। जिस खेत में विमान गिरा, उसमें कोई भी किसान नहीं था।
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पायलट बोले, सब ठीक है सब विमान से पीछे रहना
बिनौली। किसानों के मुताबिक जब वह मौके पर पहुंचे तो पायलट से जानकारी लेने का प्रयास किया गया। पायलटों ने कहा कि सब ठीक हैं। बस वे विमान से पीछे रहकर सेना की मदद करें। इस बीच पुलिस मौके पर पहुंच चुकी थी।
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आग की तरह फैली सूचना, पहुंच गए छह गांव के लोग
बिनौली। विमान रंछाड़ गांव के जंगल में जिवाना गेट के नजदीक क्रैश हुआ। जैसे ही विमान गिरा, इसके कुछ ही देर में यह सूचना आग की तरह लोगों के बीच फैल गई। सोशल मीडिया पर सूचना वायरल हुई तो आसपास के करीब छह गांव के सैकड़ों लोग मौके पर पहुंच गए। खेतों में काम कर रही महिलाओं के अलावा बच्चे भी मौके पर पहुंचे और एयरक्रॉफ्ट को देखा। मोबाइल के जरिये लोगों ने वीडियो बनाई और फोटो शेयर किए।
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