मेरठ। मुख्यमंत्री भले ही प्राथमिक शिक्षा का स्तर सुधारने की बात कर रहे हों, लेकिन धरातल पर जो स्थिति है वह सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोलने के लिए काफी है। एक जुलाई से स्कूल खुल गए हैं, लेकिन अभी तक सरकारी विद्यालयों में पुस्तक नहीं पहुंची हैं। वहीं अधिकारियों का दावा है कि 15 जुलाई तक पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएंगी।
बेसिक शिक्षा के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में आधी-अधूरी व्यवस्थाओं के साथ स्कूल खुल गए हैं। वहीं सबसे बड़ी समस्या जिले के 1.20 लाख छात्रों को मुहैय्या होने वाली पुस्तकें है। यह शासन द्वारा विभाग को उपलब्ध कराई जानी है। 50 से अधिक टाइटल वाली पुस्तकों में से विभाग को कुछ ही पुस्तकें मिली है। ये पुस्तकें कक्षा सात और आठ की है। कक्षा सात में भी दो टाइटल कृषि व गृह शिल्प की पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी दावा कर रहे हैं कि जो पुस्तकें उपलब्ध हो चुकी हैं उन्हें 2 जुलाई से ही विद्यालयों में वितरित किया जा रहा है। बाकी कक्षाओं के लिए 15 जुलाई तक पुस्तकें उपलब्ध कराने की कोशिश होगी।
पटरी पर लानी थी व्यवस्था
प्रशासन का इस बार सीबीएसई बोर्ड की तरह नया सत्र अप्रैल में शुरू कर शिक्षा व्यवस्था पटरी पर लाने का प्रयास था, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। ग्रीष्मकालीन छुट्टियों के बाद भी छात्रों को पुस्तकें उपलब्ध न होना चिंता का विषय है।
हिंदी मीडियम भी नहीं चल पा रहे
सरकारी प्राथमिक विद्यालयों को सीबीएसई पैटर्न पर चलाने की बात की जा रही है। स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती से लेकर अन्य सुविधाओं को देखकर नहीं लगता कि सही से हिंदी मीडियम स्कूल चल पाएंगे। सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को बिगड़े हुए कई साल हो चुके हैं। इसे सुधरने में काफी समय लगेगा।
ये है जिले में स्कूलों की स्थिति
प्राथमिक विद्यालय - 910
उच्च प्राथमिक विद्यालय - 432
राजकीय विद्यालय - 04
कस्तूरबा विद्यालय - 05
कंपोजिट विद्यालय - 02
यह पुस्तकें मिलीं
गणित, हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, विज्ञान, संस्कृत, अंग्रेजी, कृषि विज्ञान, गृह शिल्प आदि पुस्तकें मिली।
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वर्जन....
शासन से विभाग को अभी 3 लाख किताबें कक्षा सात और आठ की उपलब्ध कराई गई हैं। दो जुलाई से इनका वितरण लगातार किया जा रहा है। जुलाई के मध्य तक सभी छात्रों को पुस्तकें उपलब्ध करा दी जाएंगी। -सतेंद्र ढाका, बेसिक शिक्षा अधिकारी।