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कैश की किल्लत-3

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बैंकों में नहीं कैश, एटीएम खाली
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मेरठ। कैश की किल्लत से चेस्ट ब्रांचों से एटीएम को दिए जाने वाले कैश में भारी कटौती हो रही है। इस कारण शहर के एटीएम खाली पड़े हैं। वहीं लोगों को भारी परेशानी का सामान करना पड़ रहा है। मंगलवार दोपहर 1 से चार बजे तक शहर के अलग अलग स्थानों का दौरा किया तो हालात चौंकाने वाले थे। दर्जनों एटीएम में कैश ही नहीं था और लोग परेशान हो रहे थे।
पीएनबी नई सड़क
एटीएम में कैश नहीं था। यहां कैश लेने आए शास्त्री नगर सेक्टर तीन के जयपाल सिंह ने बताया कि उन्हें शादी में जाना है। कैश निकालने को आसपास के तीन एटीएम में गए, लेकिन कहीं कैश नहीं मिला। कई लोग यहां से मायूस लौटे।
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आईसीआईसीआई गढ़ रोड
नंदन सिनेमा के निकट बैंक का एटीएम खाली था। कैश लेने आ रहे लोग वापस लौटने को मजबूर थे। कुछ ने बताया कि आसपास इस रोड पर कई एटीएम नहीं चल रहे हैं।

सेंट्रल बैक ईव्ज चौराहा
ईव्ज चौराहे पर लगा सेंट्रल बैंक का एटीएम भी खाली था। यहां भी कैश ना मिलने से लोग वापस लौट रहे थे। कहना था कि सरकार 24 घंटे एटीएम सेवा की बात कहती है, लेकिन कैश होता नहीं।

एसबीआई कसेरू बक्सर टेंपो स्टैंड
एटीएम में कैश नहीं था। यहां कैश लेने आए लोगों का कहना था कि ये एटीएम दो दिन -तीन दिन पहले भी खाली था। डिवाइडर रोड पर भी कई एटीएम खाली हैं।

एसबीआई खरखौदा
यहां भी एटीएफ में पैसा नहीं था। लोगों का कहना था कि ये एटीएम कई दिनों से नो कैश है। बैंक के खाताधारकों ने बताया कि वे दो बार दूसरे बैंक के एटीएम से नकदी ले चुके हैं। तीन बार से अधिक लेने पर उन्हें अतिरिक्त चार्ज ओर झेलना होगा।

सिंडिकेट बैंक फलावदा
कस्बे में बैंक ऑफ बड़ौदा और सिंडिकेट बैंक के दो एटीएम हैं, लेकिन सिंडिकेट बैंक का एटीएम कई दिनों से खराब पड़ा है और लोग परेशान हैं। शाखा प्रबंधक का कहना है कि तकनीकी खराबी की वजह से एटीएम बंद हैं।

इनमें भी नहीं था कैश
पीएनबी डिवाइडर रोड, पीएनबी आईआईएमटी ब्रांच, पीएनबी कसेरूबक्सर, पीएनबी डिफेंस कॉलोनी

पल्लवपुरम में भी हाल बेहाल
मोदीपुरम। पल्लवपुरम में एसबीआई, बैंक ऑफ बड़ौदा, विजया बैंक, सिंडिकेट, पीएनबी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी बैंक समेत लगभग एक दर्जन से अधिक बैंको के एटीएम लगे हैं। लेकिन ज्यादातर का हाल बेहाल है। पेट्रोल पंप पर लगा एसबीआई का एटीएम पिछले दस दिन से खराब है। यहां पर एटीएम की तीन मशीनें लगी हैं, ग्राहक आते है और चले जाते हैं। अक्षर धाम निवासी डॉ. आर एस सेंगर का कहना है कि वह पिछले पांच दिन से एसबीआई के एटीएम पर पैसे लेने के लिए जा रहे है, लेकिन एटीएम बंद पड़ा है।

बैंक कर रहे ग्राहकों को मैनेज
मेरठ/खरखौदा/फलावदा। बैंक में कैश की किल्लत के चलते शाखा प्रबंधक अपनी सूझबूझ से ग्राहकों को मैनेज कर रहे हैं। खरखौदा कस्बे की एसबीआई शाखा प्रबंधक वीके टोटिया के अनुसार उनकी ब्रांच में मंगलवार को कैश कम था और भुगतान अधिक। इस वजह से बड़े भुगतान लेने वाले ग्राहकों से बुधवार को आने के लिए अनुरोध किया गया। फलावदा सिंडिकेट बैंक के प्र्रबंधक आरके शर्मा के अनुसार मंगलवार को बैंक में दोपहर तक 30 लाख का भुगतान हो गया था। इसके बाद कैश खत्म हो गया, लेकिन शाम को बैंक में नगदी जमा होने के बाद ग्राहकों को बुलाकर भुगतान किया गया।

जरूरत से आधा भी नहीं मिल रहा कैश
मेरठ। बैंकों में कैश की किल्लत से परेशान बढ़ती जा रही है। चेस्ट ब्रांचों को आवश्यकता से एक तिहाई करेंसी ही उपलब्ध हो रही है। इसका असर बैंक शाखाओं और एटीएम सेवा पर होने लगा है।
शहर की एसबीआई की एक बड़ी चेस्ट ब्रांच के अधिकारी के मुताबिक उनकी चेस्ट से जुड़ी बैंक शाखाओं और एटीएम के लिए करीब 15 करोड़ कैश की प्रतिदिन आवश्यकता है। इसके अलावा उनकी खुद की ब्रांच को भुगतान और दो एटीएम में डालने के लिए भी करीब दो करोड़ रुपये चाहिए। कुल मिलाकर उनकी 17 करोड़ प्रतिदिन की औसतन मांग है। लेकिन मांग से बहुत कम कैश उन्हें मिल पा रहा है। हाल ही में आरबीआई ने करीब 97.50 करोड़ कैश भेजा है, लेकि न इनमें भी सेंट्रल बैंक सहित कुल आठ चेस्ट ब्रांचों का कैश शामिल है। उनकी चेस्ट के लिए करीब 24 करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं, जो काफी कम हैं। अधिकारी के मुताबिक उनकी चेस्ट से बैंक की छोटी बड़ी कुल 40 शाखाएं जुड़ी हैं। उन सभी को प्रतिदिन आठ करोड़ की की नगदी की जरूरत है, लेकिन वे उन्हें 2-3 करोड़ की ही दे पा रहे हैं। वहीं इसी चेस्ट ब्रांच से 46 एटीएम जुडे़ हैं। इनके लिए प्रतिदिन करीब सात करोड़ की जरूरत है, लेकिन प्रतिदिन औसतन 2-3 करोड़ रुपये की उपलब्ध हो पा रहा है।

बैंकों में नोटबंदी जैसे हालात
एक अधिकारी ने बताया कि आरबीआई ने उनकी चेस्ट ब्रांच को जनवरी माह में करीब 195 करोड़ रुपये भेेजे थे। उसके बाद अब कैश भेजा है। जब से अब तक दूसरी चेस्ट ब्रांचों से खुद जाकर कैश ला रहे थे। आगरा और हापुड़ तक जाना पड़ा। बैंक अफसरों ने बताया कि नोटबंदी के दौरान उन्हें कैश के लिए खुद इधर उधर चेस्ट ब्रांचों पर जाना पड़ता था, वही स्थिति आज बन रही है। पब्लिक के लिए भले ही नोटबंदी खत्म हो गई हो लेकिन बैंकों में आज भी नोटबंदी से कम हालात नहीं है। अफसरों के अनुसार दो हजार के नोटों की सप्लाई ना मिलने। शादी विवाह के सीजन की वजह से बैंकों में जमा के सापेक्ष अधिक निकासी भी इसकी एक वजह है।
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चेस्ट ब्रांचों में आरबीआई से ही कम करेंसी आ रही है। इस कारण कुछ दिक्कतें हैं, लेकिन फिलहाल स्थिति समान्य है। आरबीआई से करेंसी का फ्लो बढ़ाने का अनुरोध किया गया है। राजेश सिंह, मुकेश निगम रीजनल चेयरमैन एसबीआई
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