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निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पर बैठी जांच

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निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष पर बैठी जांच
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मेरठ। नगर निगम के नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष की सदस्यता पर लगे आरोपों की जांच के लिए नगरायुक्त ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है। टीम ने शुक्रवार को जांच प्रक्रिया शुरू कर दी। जांच टीम के अध्यक्ष अपर नगरायुक्त अली हसन कर्नी ने उपाध्यक्ष इकरामुददीन को नोटिस भेजकर शुक्रवार शाम चार बजे तक अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए। लेकिन देररात तक उपाध्यक्ष की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।
नगर निगम कार्यकारिणी उपाध्यक्ष का चुनाव 20 फरवरी को हुआ था। इसमें इकरामुद्दीन सात मत पाकर कार्यकारिणी उपाध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। लेकिन भाजपा के निगम कार्यकारिणी सदस्य ललित नागदेव, महानगर अध्यक्ष करुणेश नंदन गर्ग समेत अन्य भाजपाइयों ने नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष को जीत की चुनौती दे डाली। उन्होंने उपाध्यक्ष को निगम का ठेकेदार बताकर सदस्यता निरस्त करने की मांग शुरू कर दी। शिकायत के आधार पर नगरायुक्त मनोज कुमार चौहान ने शुक्रवार को अपर नगरायुक्त अलीहसन कर्नी, चीफ इंजीनियर कुलभूषण वार्ष्णेय, एफसी संतोष शर्मा, लेखाधिकारी मनोज त्रिपाठी को जांच सौंप दी। मामले में जांच समिति अध्यक्ष अलीहसन कर्नी का कहना है कि दोनों पक्षों को सुनने के लिए ही उपाध्यक्ष को नोटिस भेजा गया है। फिलहाल उनका कोई कोई जवाब नहीं आया है। उधर विभागीय अभिलेखों से भी आरोपों की जांच की जा रही है।
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नोटिस की नहीं कोई जानकारी
नगर निगम के अधिकारियों द्वारा भेजे गए नोटिस की मुझे कोई जानकारी नहीं है। फोन पर भी कोई सूचना नहीं दी गयी है। फिलहाल मैं शहर से बाहर हूं।
इकरामुद्दीन, नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष
इंसेट=====
अपर आयुक्त और डीएम से मिले भाजपाई
इकरामुद्दीन को पार्षद से लेकर कार्यकारिणी और उपाध्यक्ष निर्वाचित किए जाने तक को भाजपाइयों ने अवैध करार दिया है। भाजपाइयों का आरोप है कि इकरामुद्दीन ने चुनाव आयोग से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को छुपाया है। इस आधार पर उनकी सदस्यता खत्म की जानी चाहिए। इस संबंध में शुक्रवार को भाजपा महानगर अध्यक्ष करुणेशनंदन गर्ग, कार्यकारिणी सदस्य ललित नागदेव, भाजपा पार्षद दल नेता विपिन जिंदल, समीर सिंह, राजेश रुहेला, विनय सोनकर, पंकज गौड़ आदि अपर आयुक्त राधेश्याम मिश्रा और डीएम अनिल ढींगरा से मिले। उन्होंने कहा कि इकरामुद्दीन नगर निगम के रजिस्टर्ड ठेकेदार हैं। उनकी निगम में रजिस्टर्ड फर्म मै. एमए कंस्ट्रक्शन का खुलासा हो चुका है। जबकि निगम एक्ट की धारा 25 की उपधारा चार में स्पष्ट है कि कोई भी पार्षद नगर निगम का ठेकेदार नहीं होना चाहिए। इस आधार पर इकरामुद्दीन की पार्षदी निरस्त की जानी चाहिए। भाजपाइयों ने आरोप लगाया कि निगम से ठेकेदार की फर्म की पत्रावलियां गायब करने का प्रयास किया जा रहा है। ये फाइलें तत्काल कब्जे में ली जानी चाहिए। ताकि जांच प्रभावित न हो। अपर आयुक्त और डीएम ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है।

खास खबरें
- जांच टीम अध्यक्ष ने लगाए गए आरोपों पर नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष से मांगा स्पष्टीकरण
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