मेरठ। एवियन इंफ्लूएंजा (बर्ड फ्लू) की रोकथाम के लिए सोमवार को विकास भवन में एक दिवसीय कार्यशाला हुई। इसमें पशु विशेषज्ञ चिकित्सकों ने पशुओं में खुरपका - मुंहपका रोग नियंत्रण की भी जानकारी दी। सीडीओ आर्यका अखौरी ने कहा कि बर्ड फ्लू को जागरूकता से ही रोका जा सकता है।
उन्होंने कहा कि बर्ड फ्लू एक गंभीर समस्या है, जिस पर इस कार्यशाला का आयोजन एक बेहतर पहल है। एवियन इंफ्लूएंजा (एच5एन1) वायरस बर्ड फ्लू के नाम चर्चित है। इस खतरनाक वायरस का संक्रमण इंसानों और पक्षियों को अधिक प्रभावित करता है। इस वायरस के प्रति जागरूक होकर उसकी रोकथाम के लिए सभी संबंधित विभाग आपस में समन्वय बनाकर कार्य योजना तैयार करें। ताकि इस समस्या से समय रहते निपटा जा सके। इसके अलावा जनता को इस बीमारी के प्रति जागरूक भी करें और बचाव के उपाय भी बताएं।
ये हैं बर्ड फ्लू के लक्षण
अपर निदेशक पशुपालन डॉ. एसके श्रीवास्तव ने कहा कि बर्ड फ्लू के लक्षण होने पर बुखार, हमेशा कफ रहना, नाक बहना, सिर में दर्द रहना, गले में सूजन, मांसपेशियों में दर्द, दस्त होना, हर वक्त उल्टी लगना सा महसूस होना, पेट के निचले हिस्से में दर्द रहना, सांस लेने में समस्या, सांस न आना, निमोनिया आदि है। इंसानों में यह वायरस संक्रमित मुर्गियों या अन्य पक्षियों के बेहद निकट रहने से फैलती है। मुर्गी की अलग-अलग प्रजातियों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध में रहने से इंसानों में बर्ड फ्लू का वायरस फैलता है। इंसानों में यह वायरस आंख, नाक और मुंह के जरिये फैलता है।
ये हैं बचाव के उपाय
अपर निदेशक पशुपालन ने कहा कि मरे हुए पक्षियों से दूर रहें। किसी पक्षी की मौत हो जाती है तो इसकी सूचना पशुपालन विभाग को दें। बर्ड फ्लू वाले एरिया में मांसाहार न खाएं, जहां से मांस खरीदें वहां सफाई का पूरा ध्यान रखें। बर्ड फ्लू का इलाज एंटीवायरल ड्रग ओसेल्टामिविर और जानामिविर (रेलेएंजा) से किया जाता है। इस वायरस को कम करने के लिए पूरी तरह आराम करना चाहिए। खाना पौष्टिक हो और ज्यादा ज्यादा से तरल पदार्थ लें। बैठक का संचालन मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डा. एके सिंह ने किया। सीएमओ डा. राजकुमार, परियोजना निदेशक भानू प्रताप सिंह, डॉ. वीपी सिंह, डॉ. प्रमोद कुमार ने भी विचार रखे।