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प्रसव कक्ष का हाल बेहाल, बेड में कॉकरोच, ई-रिक्शा मामले में बैठी जांच

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प्रसव कक्ष का हाल बेहाल, प्रसूता के बेड पर कॉकरोच
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- चादरें नहीं, गद्दे भी फट चुके, भड़केएसआईसी
- साफ-सफाई और चादरें बिछाने की दी हिदायत
- इलाज नहीं बीमार कर देगी अस्पताल की ये हालत

अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। मेडिकल अस्पताल में ई-रिक्शा में एक महिला की डिलीवरी होने के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया है। मंगलवार को नए प्रमुख अधीक्षक (एसआईसी) डॉ. अजीत चौधरी ने प्रसव कक्ष का जायजा लिया, लेकिन वहां केहालात देखकर वे दंग रह गए। अधिकांश बेडों पर चादरें ही नहीं थीं। उनके गद्दे भी फट चुकेहैं और कई में कॉकरोच भी निकले। जगह-जगह गंदगी और वॉशबेसन के नीचे पानी भरा हुआ मिला। इस पर वे भड़क गए और उन्होंने कर्मचारियों की जमकर क्लास ली।
मेडिकल अस्पताल के प्रसव कक्ष का हाल देखकर ऐसा लगता है कि यहां इलाज कराने आए लोग नई बीमारी लेकर जाएंगे। दोपहर करीब साढ़े तीन बजे जब एसआईसी वहां पहुंचे तो तीमारदार उनसे मेडिकल स्टाफ की शिकायत करने लगे। किसी ने आरोप लगाया कि उनकी महिला मरीज का कोई हाल पूछने नहीं आया है। दूसरी तरफ, वहां भर्ती महिलाओं का कहना था कि इक्का-दुक्का बेड पर ही चादरें बिछाई जाती हैं, बाकी खाली रहते हैं। इसके अलावा बेड पर कॉकरोच रहते हैं, जिनसे नवजात और प्रसूताएं परेशान रहती हैं। एसआईसी ने वार्ड की इंचार्ज को बुलाया और उनसे चादरें न बिछाने का कारण पूछा। उसका कहना था कि चादरों की कोई जिम्मेदारी नहीं लेता है, लिहाजा सिर्फ उन्हीं बेड पर चादरें बिछाई जाती हैं, जिन पर मरीज होते हैं। एसआईसी ने सभी बेडों पर चादरें बिछाने और वार्ड में साफ-सफाई की हिदायत दी है।
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यह था मामला
सोमवार को 108 एंबुलेंस के समय पर न आने और मेडिकल में स्टाफ द्वारा टालमटोल करने के कारण महिला की ई रिक्शा में ही डिलीवरी करानी पड़ी थी। बाद में उसे वार्ड में भर्ती कराया गया था। महिला सुमन (28) है, जिसने एक बेटी का जन्म दिया है। वह कांशीराम आवासीय कालोनी में रहती है।
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प्राचार्य ने गठित की तीन सदस्य जांच कमेटी

अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। ई-रिक्शा में महिला की डिलीवरी मामले में कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. कीर्ति दूबे ने तीन सदस्य जांच कमेटी गठित की है, जो इस मामले की जांच करेगी और पता करेगी कि कहीं मेडिकल स्टाफ ने तो लापरवाही नहीं की। यह कमेटी एक सप्ताह के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट उन्हें देगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। दूसरी तरफ, मंगलवार दोपहर सुमन को डिस्चार्ज कर दिया गया। उसके परिजनों का कहना है कि अब सुमन और उसकी बच्ची ठीक है। वहीं, अस्पताल सूत्रों का कहना है कि मेडिकल स्टाफ ने सुमन के परिजनों से लिखवाकर भी ले लिया है कि उन्हें अस्पताल में किसी तरह की समस्या नहीं हुई है। स्टाफ ने उनकी काफी मदद की है।
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वो कौन थी मददगार, एसआईसी देंगे पुरस्कार
एसआईसी डॉ. अजीत चौधरी ने बताया कि सुमन की डिलीवरी कराने में एक मुस्लिम महिला ने काफी मदद की थी। वह उससे मिले भी थे, हालांकि डिलीवरी के बाद उसे काफी तलाश किया गया, मगर वह नहीं मिली। उसका नाम-पता और फोन नंबर वह नहीं ले सके। उसे तलाश कराया जा रहा है, मिलने पर उसे वह पुरस्कृत करेंगे।
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