कारगिल शहीदों को नमन, परिजनों का सम्मान
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
कारगिल विजय दिवस के अवसर पर शहीदों की शहादत को याद किया गया। पश्चिम उप्र सब एरिया हेड क्वार्टर ने शहीदों के सम्मान में शानदार कार्यक्रम किया। वीर नारियों को सम्मानित कर उनके हर सुख-दुख में साझी रहने का भरोसा दिलाया गया। सेवानिवृत्त अधिकारियों और जवानों के साथ 80 साल से अधिक उम्र के अधिकारी और जवानों को भी सम्मानित किया गया। नौ सेवानिवृत्त अधिकारियों को गैलेंट्री अवार्ड से नवाजा गया। जीओसी सब एरिया मेजर जनरल के मनमीत सिंह, आरवीसी कॉलेज एंड सेंटर के कमांडेंट मेजर जनरल अनिल कुमार, मिलिट्री हॉस्पिटल के कमांडेंट ब्रिगेडियर एसके गुप्ता और डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर सुशील कुमार मान ने सम्मानित किया।
अमिट है साहस की वीर गाथा
सब एरिया हेड क्वार्टर की ओर से आरवीसी कॉलेज एंड सेंटर के भंडारी हॉल में आयोजित कार्यक्रम में जीओसी मेजर जनरल के मनमीत सिंह ने कहा कि कारगिल में ऑपरेशन विजय को सफल बनाकर हमारे जांबाजों ने साहस की ऐसी वीर गाथा लिखी है जो अमिट है। आन, बान और मर्यादा के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी। इस जज्बे का कोई मोल नहीं है। इस मौके पर वह वीर नारियों, सेनानी और सेवानिवृत्तों का अभिनंदन करते हैं। सेना वीर नारियों के सुख-दुख में शामिल रहेगी। कारगिल देशभक्ति के जज्बे का प्रतीक है।
न ऊंचाई से घबराए, न गोलियों से
197 मीडियम रेजीमेंट के कर्नल प्रवीण कुमार ने युद्ध में अपनी पलटन की भूमिका के बारे में बताया। उन्होंने कहा अप्रैल और मई में घुसपैठ हुई थी। उनकी पलटन को 13 मई को द्रास सेक्टर में जाने का आदेश मिला। शरीफाबाद में तैनात आठ माउंट डिविजन के साथ मिलकर उनको जंग के मैदान में कूदना था। 15 मई को पहली बैट्री रवाना हुई। 16 को दूसरी भेजी गई। 17 मई को द्रास पहुंच गए। उनकी पलटन के मेजर विवेक गुप्ता दो घंटे तक जंग के कमांडिंग ऑफिसर रहे। 23 हजार राउंड फायर किए। करीब 13500 फुट ऊंचाई पर लड़ाई लड़ी और दुश्मन को पीछे धकेला। यूनिट को 2005 में ऑनर टाइटिल मिला।
लीडर को बोला तुझे छोड़ देंगे
17 गढ़वाल राइफल के सूबेदार मेजर ने युद्ध में अपनी रेजीमेंट का किस्सा सुनाया। 31 मई को रेजीमेंट को सूचना मिली। तब वह पिथौरागढ़ में तैनात थी। बटालिक सेक्टर में जाने का आदेश मिला था। 10 जून को कंपनी नींबू क्षेत्र में पहुंच गई। आठ ब्रिगेड वहां पहले से थी। 29 जून को कंपनी को काला पत्थर क्षेत्र में जाने को कहा गया। बारिश तेज थी। दुश्मन भी नजर रखे था। फायरिंग के बीच कदम रुके नहीं। लांस नायक देवेंद्र और कैप्टन जिंटू गोगाई ने अदम्य साहस दिखाया। लीडर कैप्टन गोगाई को दुश्मनों ने छोड़ देने का लालच दिया। कंपनी ने डटकर सामना किया और दुश्मन को भगाया। एक अधिकारी, 10 जवान शहीद हुए। कंपनी को बेटल ऑनर मिला।
शहीद की बेटियां सेना में जाने को तैयार
जम्मू-कश्मीर में 17 अगस्त 2003 को लांस नायक देशपाल सिंह आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गए थे। वह राजपूताना राइफल्स में तैनात थे। कंकरखेड़ा में श्रद्धापुरी निवासी देशपाल सिंह की बेटी प्रिया चौधरी को सम्मानित किया गया। प्रिया बीए अंग्रेजी ऑनर्स कर रही हैं। वह सेना में जाना चाहती हैं। बड़ी बहन आरती सीडीएस की तैयारी कर रही हैं। दोनों बहनों का लक्ष्य सेना में जाना है। मां बबीता गृहणी हैं।
पाइन डिवीजन ने श्रद्धांजलि दी
विजय दिवस के मौके पर पाइन डिवीजन ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। डिप्टी जीओसी ब्रिगेडियर अनित कोरा सेवा मेडल ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सेवानिवृत्त अधिकारी और जवान मौजूद रहे। सेवानिवृत्त अधिकारियों ने भी पुष्प चक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। गौरतलब है कि पाइन डिवीजन के क्षेत्र में 17 गढ़वाल रेजीमेंट है। 17 गढ़वाल का कारगिल युद्ध में महत्वपूर्ण योगदान रहा था।
प्रमुख बातें ===
पश्चिमी यूपी सब एरिया हेड क्वार्टर ने विजय दिवस पर किया कार्यक्रम आयोजन
वीर नारियों और सेवानिवृत्तों को किया सम्मानित, नौ को गैलेंट्री अवार्ड से नवाजा
80 साल से अधिक उम्र के सेवानिवृत्तों का भी सम्मान