अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ। प्री-मानसून बारिश से जहां शहरवासियों को गर्मी से निजात मिली वहीं शहर की बिजली व्यवस्था पटरी से उतर गई। बारिश और तेज हवा ने पीवीवीएनएल के करीब 400 करोड़ रुपये से दुरुस्त हुए पावर सिस्टम की पोल खोलकर रख दी। शहरभर में हुए फाल्ट 12 से 16 घंटे में ठीक हो सके। बिना बिजली के लोगों को पीने का पानी तक नहीं मिल सका।
पीवीवीएनएल ने शहर के बिजली ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए करीब 400 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं के माध्यम से खर्च किए। इसके बाद भी हल्की बारिश और हवा में ही शहर की बिजली व्यवस्था चरमरा जाती है। सोमवार रात तड़के हुई प्री-मानसून बारिश ने शहर से लेकर गांव तक की बिजली को पटरी से उतार दिया। ट्रांसमिशन से बिजलीघरों को जा रही 33 केवी लाइनों और 11 केवी लाइन में फाल्ट हुए। जगह-जगह पानी के चलते जंफर और इंसुलेटर उड़ने की शिकायत मिली। लिसाड़ी गेट, लिसाड़ी रोड, विकासपुरी, नौचंदी, हापुड़ रोड बिजलीघर के करीब आधा दर्जन फीडरों पर रात भर बिजली आपूर्ति बाधित हुई। इसके चलते करीब दो लाख लोगों की आबादी को रातभर बिजली नहीं मिल सकी। सुबह बारिश होने पर पुराना आरटीओ, पल्लवपुरम फेज वन व टू, लेडीज पार्क, रामलीला ग्राउंड, माधवपुरम, एमईएस, गंगानगर, सेंट लुक्स, मोहनपुरी, सिविल लाइन, अम्हैड़ा, अमन विहार, टाउन हाल, मेडिकल और मलियाना में एक के बाद एक फाल्ट होने से क्षेत्र की बिजली ठप हो गई। बारिश बंद होने के बाद कर्मचारी फाल्ट ठीक करने के लिए निकले तो घंटो तक पेट्रोलिंग ही करते रहे। माइनर फाल्ट मिलने में ज्यादा दिक्कत हुई। करीब 12 से 16 घंटे बिजली आपूर्ति पटरी से उतरी रही। बिजली जाने से लोगों को पीने का पानी भी नहीं मिल सका। लोग बिजलीघर पर फोन करके जानकारी करते रहे।
- 400 करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी बारिश में नहीं टिकती बिजली
- 12 से 16 घंटे तक ठीक नहीं हो सके फाल्ट, लोग पीने के पानी को भी तरसे