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पहले दस रोजे गुनाहों की माफी के लिए

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पहले दस रोजे गुनाहों की माफी के लिए
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माछरा/मुंडाली। रमजान उल मुबारक के पहले जुम्मे को देश मे अमन चैन के लिए दुआ कराई गई। किठौर हापुड़ मार्ग पर सरावनी में स्थित मदीना मस्जिद के इमाम रईश मलिक ने दोपहर मस्जिदों में अकीदतमंदो को नमाज अदा कराई। नमाज से पूर्व रमजान की अजमत पर रोशनी डाली गयी। इमाम रईश मलिक ने तकरीर करते हुए अपने खिताब में कहा कि तीस रोजों मे पहले दस रोजे गुनाह से माफी के लिए है इन दिनो रोजे रखकर तथा सच्चे दिल से पशे मानी करने वालों को अल्लाह पाक माफ कर देते है वहीं उससे अगले दस रोजे जहन्नुम नरक की आग से निजात दिलाते है अल्लाह से माफी पाकर गुनाह माफ हो जाते है और जहन्नुम की आग रोजेदारों के लिए ठंडी करने का वायदा अल्लाह पाक करता है। वहीं अंतिम दस रोजों के बारे में कुरआन पाक के हवाले से बताया कि यह रोजे जन्नत मे दाखिले के लिए रोजेदार की मदद करते है।
क्षेत्र क खंद्रावली, बहरोड़ा, हसनपुर कलां, रछौती, जिसोरा, अजराड़ा, जिसोरी, शाफियाबाद लोटी, हसनपुर कलां, आड, नंगला कबूलपुर, सिसौली, मऊखास, नंगलामल, कायस्थ बढ्ढा आदि गांवों की मस्जिदों मे जुम्मे की नमाज अदा की गई। नमाजियों की तादाद बढ़ने पर कुछ मस्जिदों की छतों पर भी सफे बिछाकर नमाज अदा की।
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रमजान में झूठ बोलना, रोजे की अहमियत को खत्म करना है
मवाना। रमजान माह में रहमत और बरकते हर उस मोमिन पर उतार दी जाती है जो अल्लाह के हुक्म को पूरा करते हुए रोजा रखे और पूरी इमानदारी से इबादत भी करें ऐसा करने वालों को अल्लाह खुद अपने हाथों से इनाम से नवाजता है ताकि तुम ईमान और तकवे वाले बनो।
इसी महीने में कुरआन शरीफ को हजरत मोहम्मद पर मुकम्मल उतारा गया। रोजे से मुराद प्यासे रहने से नहीं है और ना ही ऐसे काम अल्लाह को पसंद है। जो इंसान रोजे के दौरान झूठी बात कहने और झूठ पर अमल करने तथा बुराई से ना बचे अल्लाह ताला को उसकी इबादत भूखा प्यासा रहना कोई अहमियत नहीं रखता। रमजान का महीना भलाई बरकत रहमत के अलावा दुआ कुबूल होने का महीना है। पूर्व में की गई गुनाह से तौबा कर लेने से सारी गुनाह माफ कर दी जाती है वह मोमिन खुश किस्मत माना गया है जो कि साफ मन से शांति के साथ जिंदगी गुजारे। इस महीने में दोजख के दरवाजे महीने भर के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इस माह में नेकी और इबादत का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है खुदा फरमाता है रोजा रखने के बाद यह एहसास करना भी जरूरी है। रोजा रखने के बाद खैरात जकात की भी विशेष अहमियत है।
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रमजान बरकत और पाकीजगी का महीना
सरूरपुर। पाक रमजान-उल-मुबारक माह के पहले जुमा पर अकीदतमंदों ने पूरी शिद्दत और अकीदत के साथ रोजा रखा। शुक्रवार को रमजान के पहले जुमे को लेकर विभिन्न मस्जिदों में नमाज पढ़ने वालों की भीड़ उमड़ पड़ी। कस्बा हर्रा, खिवाई, जसड़ सुलताननगर, जैनपुर, मैनापूठी, पांचली बुजुर्ग, दमगढ़ी, रोहटा, सलाहपुर, पूठ आदि में अकीदतमंदों ने नमाज पढ़कर अमन चैन की दुआ मांगी। मस्जिदों में बयान करते हुए आलिमों ने कहा कि रमजान का महीना पाक महीना है। इसे इबादत, रहमत व मगफिरत के साथ बिताना चाहिए। बताया कि रमजान का महीना बरकत और पाकीजगी का ऐसा महीना है जिसमें अल्लाह की रहमत बरसती हैं। इस महीने में मुसलमान रोजे रखकर परहेजगारी का इम्तिहान देते है ताकि दूसरों की भूख प्यास का अहसास किया जा सके। दमगढ़ी स्थित मदीना मस्जिद के इमाम नूर मौहम्मद ने बताया कि रोजे का मकसद महज भूख प्यास नहीं है बल्कि बदन के हर हिस्से रोजा पाबंदी के साथ होना चाहिए। रोजे के दौरान झूठ बोलने, चुगली करने, किसी पर बुरी निगाह डालने व हर छोटी से छोटी बुराई से दूर रहना जरूरी हैं। लिहाजा अल्लाह ने रमजान का महीना सादगी के साथ इबादत के लिए तय किया गया हैं। जामा मस्जिद के इमाम मौलाना इरशाद ने बताया कि इस्लाम धर्म में अल्लाह को समय पर याद करने और उनकी इबादत करने के समय को काफी अहम माना गया है।
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