- औषधि प्रशासन विंग ने सरधना में मेडिकल एजेंसी के गोदाम पर मारा छापा
- संचालक पिता-पुत्र हिरासत में, सरधना थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर
अमर उजाला ब्यूरो
सरधना (मेरठ)। कोतवाली क्षेत्र के गांव मुल्हेड़ा में सोमवार को ड्रग्स सहायक आयुक्त औषधि के नेतृत्व में विभाग एवं पुलिस की संयुक्त टीम ने मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा। इस दौरान एजेंसी के गोदाम से नकली दवाई के शक में करीब 36 लाख रुपये कीमत की दवाइयां बरामद की गईं। इनके सैंपल जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सरधना थाने में एफआईआर दर्ज कराकर संचालक और उसके पुत्र को हिरासत में लिया गया है।
सहायक आयुक्त औषधि प्रशासन राजेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि ड्रग्स विभाग को रुड़की की एक फर्जी कंपनी में इन एंटीबॉयोटिक दवा बनाने की जानकारी आ रही थी। सोमवार को मुखबिर की सटीक सूचना पर ड्रग्स विभाग की टीम ने श्याम मेडिकल एजेंसी के गोदाम पर छापामार कार्रवाई करके 36 लाख रुपये से अधिक की एंटीबॉयोटिक दवाइयों को बरामद कर लिया। टीम में थानाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह राठौर, ड्रग्स विभाग की टीम में ड्रग्स इंस्पेक्टर बागपत वैभव बब्बर, ड्रग्स इंस्पेक्टर मेरठ पवन शाक्य, ड्रग्स इंस्पेक्टर हापुड़ लवकुश प्रसाद, ड्रग्स इंस्पेक्टर बुलंदशहर दीपा लाल भी शामिल रहे। ड्रग्स सहायक आयुक्त ने बताया कि छापेमारी के दौरान मेडिकल संचालक तो मौके से भाग निकला जबकि उसका बेटा व एक अन्य को मौके से पकड़ा गया है। बाद में संचालक भी आ गया। उन्होंने बताया कि दवाइयों का गोदाम बिना लाइसेंस के चल रहा था। साथ ही जो दवाइयां बरामद हुई हैं, उनमें नकली होने का पूरा संदेह है। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। एंटीबॉयोटिक नकली दवा को कैसे तैयार किया जा रहा था, उसकी भी जांच कराई जाएगी। एंटीबायोटिक दवाइयां विभिन्न मर्जों में इस्तेमाल की जाती हैं।
दिसंबर में सैंपल में निकली थी खड़िया
ड्रग्स विभाग की टीम ने पिछले साल इस मेडिकल एजेंसी पर छापेमारी कर एंटीबायोटिक दवा के सैंपल लिए थे। दिसंबर 2018 में इसकी रिपोर्ट आई थी। ड्रग्स इंस्पेक्टर पवन शाक्य ने बताया कि दवा में एंटीबायोटिक का साल्ट ही नहीं निकला था, उसे सामान्य शब्दों में खड़िया कह सकते हैं। उन्होंने बताया कि इसी के बाद संदेह हुआ था कि यहां नकली एंटीबायोटिक दवाइयां बन रही होंगी। तभी से इसकी मॉनिटरिंग की जा रही थी और अब छापेमारी की गई।
होगी पड़ताल, कहां-कहां थी सप्लाई
सहायक आयुक्त ने बताया कि विभाग यह पड़ताल करेगा कि इस दवा की कहां-कहां सप्लाई की जाती थी। किन मेडिकल स्टोरों पर सप्लाई होती थी। मेरठ में ही सप्लाई होती थी या दूसरे जिलों में भी इसकी सप्लाई होती थी। यह जांच के बाद ही पता चल पाएगा।
कैसे करें एतबार, महीनों नहीं आती रिपोर्ट
दवा सैंपलों की रिपोर्ट कई-कई माह तक नहीं आती है। पिछले साल विभाग ने 200 दवाओं के सैंपलों की जांच रिपोर्ट भेजी थी। लेकिन उसमें से दर्जन भर की ही रिपोर्ट आई थी। बाकी की रिपोर्ट अटकी है। सिर्फ एक ड्रग्स इंस्पेक्टर के जिम्मे चार हजार मेडिकल स्टोरों की जिम्मेदारी है। एक ड्रग्स इंस्पेक्टर का पद रिक्त है। अधिकारियों का कहना है कि केंद्रीय लैब पर दबाव होने के कारण रिपोर्ट आने में देरी होती है। मेडिकल कॉलेज में भी लैब का निर्माण चल रहा है। यहां लैब बनने पर दबाव घटेगा।