फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

छात्रों को कक्षाओं तक लाना, कॉलेजों के लिए बड़ी चुनौती

विज्ञापन
विज्ञापन
(सात फरवरी 2018 पेज एक की पीडीएफ लगेगी।)
विज्ञापन


कक्षाएं चलेंगी या मॉल्स-पार्कों में घूमेंगे छात्र
- राज्यपाल और डिप्टी सीएम ने इस बार से हाजिरी को लेकर सख्ती करने को कहा
- कोएड कॉलेजों में खाली पड़ी रहती हैं कक्षाएं, गर्ल्स कॉलेजों में काबू में हैं हालात
- प्राचार्य बोले, पैरेंट्स को बुलाकर करेंगे काउंसिलिंग, हाजिरी पूरी नहीं तो रोकेंगे फार्म
अमर उजाला ब्यूरो
मेरठ।
मेरठ कॉलेज में पिछले सत्र में एक तस्वीर सामने आई थी, जिसमें कक्षा में एक छात्र को एक ही शिक्षक पढ़ा रहे थे। 10 हजार छात्र-छात्राओं वाले कॉलेज में इस हकीकत ने शिक्षा के सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए थे। बृहस्पतिवार को मेरठ आए राज्यपाल और डिप्टी सीएम ने भी शिक्षा के गिरते स्तर और खराब रिजल्ट के लिए छात्रों की गैरहाजिरी को अहम बताया। उन्होंने कहा कि इस बार से सरकार कॉलेजों में 75 फीसदी हाजिरी हर सूरत में लागू कराएगी।
जिले के कॉलेजों में छात्र-छात्राओं को कक्षाओं तक लाना प्राचार्यों के लिए बड़ी चुनौती है। गर्ल्स कॉलेजों में तो इसको लेकर कड़े नियम बनाए जा रहे हैं, लेकिन कोएड कॉलेजों में इस पर कितना अमल हो पाएगा, ये वक्त ही बताएगा। बहरहाल, 75 फीसदी हाजिरी को लेकर शहर के कॉलेजों के सभी प्राचार्यों से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इस बार से बदलाव दिखेगा। ऐसे में देखना ये है कि छात्र कक्षाओं में पढ़ते दिखेंगे या फिर बैग पीठ पर लटकाकर मॉल्स और पार्कों में घूमते नजर आएंगे।
विज्ञापन

हर माह भेजा जाएगा रिकार्ड
मेरठ कॉलेज की प्राचार्य डॉ. आभा चंद्रा ने बताया कि इस बार से कॉलेज में हाजिरी को लेकर पूरी प्लानिंग की जा रही है। शिक्षकों से रोजाना हाजिरी लेने और नहीं आने वालों की अनुपस्थिति दर्ज करने को कहा है। हर महीने इसका रिकॉर्ड भेजा जाएगा। डीएन कॉलेज के प्राचार्य डॉ. बीएस यादव ने बताया कि सोमवार के बाद से कुछ कक्षाएं शुरू करा दी जाएंगी। एडमिशन पूरे होते ही सभी छात्रों के पैरेंट्स को बुलाकर काउसिंलिंग कराएंगे। छात्र-छात्राएं कॉलेज नहीं आए तो छात्रवृत्ति रोकेंगे। साथ ही परीक्षा फार्म नहीं भरने दिया जाएगा।
पैरेंट्स को देंगे सूचना
एनएएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. वीपी राकेश बताते हैं कि रोजाना हाजिरी रजिस्टर में अनुपस्थिति दर्ज कराएंगे। जो नहीं आएंगे उनके नाम कॉलेज की वेबसाइट पर डालेंगे। आरजी कॉलेज की प्राचार्य डॉ. अर्चना शर्मा ने बताया कि हाजिरी को लेकर सख्ती होगी। जो छात्राएं नहीं आएंगी उनकी छात्रवृत्ति भी नहीं मिलेगी। परीक्षा फार्म नहीं भरवाए जाएंगे। शहीद मंगल पांडे कॉलेज की प्राचार्य डॉ. संध्या रानी ने बताया कि जो छात्राएं नहीं आएंगी उनके पैरेंट्स को सूचना दी जाएगी। अनुपस्थिति कम होने पर परीक्षा फार्म नहीं भरवाएंगे। इस्माईल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. नीलिमा गुप्ता ने बताया कि बायोेमीट्रिक हाजिरी लगवाई जा रही है। जब तक सारे एडमिशन नहीं हो जाते हैं तब तक रजिस्टर में भी हाजिरी लगवाएंगे। कनोहरलाल गर्ल्स कॉलेज की प्राचार्य डॉ. किरन प्रदीप का कहना है कि कुछ कक्षाएं शुरू करा दी गई हैं। जिसकी हाजिरी कम होगी उसको छात्रवृत्ति नहीं देंगे।

बड़ी संख्या में हो रहे फेल
छात्र-छात्राओं के कक्षाओं में नहीं जाने से पढ़ाई पर इसका असर पड़ रहा है। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं फेल हो रहे हैं। इस बार यूनिवर्सिटी की परीक्षाओं में बीए फर्स्ट ईयर में 65 फीसदी से ज्यादा छात्र-छात्राएं फेल हैं। बीएससी में 71 फीसदी और बीकॉम में भी 55 फीसदी से ज्यादा फेल हैं। तीनों विषयों की बात करें तो 92 हजार छात्रों में से 55 हजार के करीब छात्र-छात्राएं फेल हुए हैं।
विज्ञापन

विवि भी तो करे मॉनीटरिंग
एक कॉलेज के शिक्षक बताते हैं कि पिछली बार उनके यहां से कुछ छात्रों के परीक्षा फार्म नहीं भेजे गए थे। इसके बावजूद विवि ने उनको परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी। ऐसे में विवि भी मॉनीटरिंग करे। अगर ऐसे परीक्षा में बिठाते रहेंगे तो कोई कॉलेज क्यों आएगा।


विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें