विश्व तंबाकू निषेध दिवस आज
सावधान! हर साल बढ़ रहे तंबाकू से कैंसर के मरीज
मेरठ। हर साल 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है, लेकिन लोग इससे आगाह नहीं हो रहे हैं। शायद यही वजह है कि तंबाकू से कैंसर के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। सावधान नहीं हुए तो यह संख्या लगातार बढ़ती जाएगी।
कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. उमंग मित्तल का कहना है कि देशभर में हर साल करीब 10 लाख कैंसर के नए मरीज बढ़ रहे हैं। इनमें से छह-सात लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है। मेरठ में हर महीने करीब 80 से 100 नए कैंसर के मरीज आते हैं। इनमें 40 से 50 तंबाकू उत्पाद के कारण कैंसर से पीड़ित होते हैं। 75 प्रतिशत लोगों को 14-15 साल की उम्र यह लत लग जाती है। महज तीन सेकेंड में इसकी लत लग सकती है, लिहाजा एक कश भी खतरनाक है।
सुभारती डेंटल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. निखिल श्रीवास्तव का कहना है कि तंबाकू की लत से निजात पाना मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं। सिर्फ 15 दिन मेहनत करके इस आदत को छोड़ सकते हैं। जरूरत है पक्के इरादे की। उन्होंने बताया कि एक रिपोर्ट के मुताबिक एक तिहाई वयस्क भारतीय इस बुरी आदत से ग्रसित हैं, इनमें से 15 प्रतिशत 13 से 15 साल के बच्चे हैं। अमूमन पूरे विश्व के लगभग 90 प्रतिशत तंबाकू खाने वाले लोग भारत में निवास करते हैं। तंबाकू के 250 प्रकार हैं और किसी भी प्रकार के तंबाकू में पांच से सात हजार तक हानिकारक रासायनिक तत्व मौजूद होते हैं जिनमें से 30 से 70 रसायन कैंसर करने की क्षमता रखते हैं।
सुभारती में किया गया जागरूक
सुभारती में तंबाकू के खतरों के प्रति आगाह किया गया। तंबाकू और शराब किसी भी प्रकार के कैंसर के सबसे बड़े कारण हैं एवं लगभग 90 प्रतिशत मामलों में इनका निरंतर सेवन करना पाया गया है। भारत में सभी प्रकार के कैंसर में मुख का कैंसर तीसरे नंबर पर आता है। भारत में तंबाकू सेवन करने वाले प्रत्येक 100 लोगों में से करीब 40 लोगों को मुख का कैंसर होता है। ज्यादातर मुख के कैंसर का काफी देर से पता चलने के कारण इसका सफल इलाज नहीं किया जा पाता है।
जिला अस्पताल के गेट पर ही बिकते हैं गुटखे
कोटपा (सिगरेट एवं अन्य तम्बाकू उत्पाद) अधिनियम के तहत पिछले एक साल में सिर्फ एक व्यक्ति के खिलाफ जिला अस्पताल में कार्रवाई हुई है, जबकि लोग खुलेआम सिगरेट और बीडी के कश लगा रहे हैं। अस्पतालों और स्कूल के आसपास तंबाकू उत्पाद बेचे जा रहे हैं। जिला अस्पताल के गेट पर ही गुटखे बेचे जाते हैं।
यह है नियम
तंबाकू उत्पादों के नुकसान से बचाने के लिए वर्ष 2003 में कोटपा अधिनियम बनाया गया था। इसके तहत सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करना प्रतिबंधित है। इसका उल्लंघन करने पर जुर्माने का प्रावधान है। नियमों के मुताबिक, अस्पताल और स्कूलों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की दुकान होने और नाबालिगों को तंबाकू उत्पाद न बेचने का प्रावधान है। सार्वजनिक स्थल पर धूम्रपान करने पर 200 रुपये जुर्माने का प्रावधान है। दुकानों पर तंबाकू उत्पादों के खतरा दर्शाने वाला बोर्ड न लगाने पर एक से पांच हजार रुपये तक जुर्माना हो सकता है। नाबालिग को तंबाकू उत्पाद बेचने पर 200 रुपये जुर्माना है।
महिलाएं भी पीड़ित
मॉडर्न दिखने के लिए महिलाएं भी धूम्रपान करने लगी हैं। इससे न सिर्फ उन पर बल्कि उनके गर्भ में पल रहे बच्चे पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे सिर्फ धूम्रपान करने वालों को ही नुकसान नहीं होता, बल्कि धूम्रपान करने वालों के संपर्क में रहने वालों को आंख, गले, नाक में जलन की तकलीफ होती है। फेफड़े के कैंसर और गंभीर हृदय रोग हो सकते हैं।
जन जागरूकता रैली
स्वास्थ्य विभाग बृहस्पतिवार को विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर पीएल शर्मा जिला अस्पताल से जन जागरूकता रैली निकालेगा। इस दौरान तंबाकू सेवन के खतरों की जानकारी दी जाएगी।