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प्री-पीएचडी कोर्स वर्क में फेल छात्रों ने की दोबारा मूल्यांकन की मांग

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प्री-पीएचडी कोर्स वर्क में होगी रैंडम सैंपलिंग
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मेरठ। प्री पीएचडी कोर्स वर्क में फेल छात्रों ने सोमवार को प्रो-वाइस चांसलर से मिलकर दोबारा मूल्यांकन कराने की मांग की है। छात्रों ने कहा कि बड़ी संख्या में प्री-पीएचडी कोर्स वर्क में नेट और जेआरएफ पास छात्र फेल कर दिए गए हैं। ऐसे में इसकी जांच कराई जाए। प्रो वाइस चांसलर ने रैंडम सैंपलिंग कराने के आदेश दिए हैं।
विवि में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए इसी साल से छह महीने के लिए प्री पीएचडी कोर्स वर्क की शुरुआत की गई है। इसके लिए छात्रों को 25 हजार रुपये फीस भी देनी है। आरडीसी से पहले प्री पीएचडी कोर्स वर्क करना जरूरी है। नेट और जेआरएफ पास छात्रों को भी प्री पीएचडी कोर्स वर्क करना अनिवार्य है। हाल ही में प्री पीएचडी कोर्स वर्क की परीक्षा का रिजल्ट आया है। इसमें सभी विषयों में 50 फीसदी से ज्यादा छात्र फेल हो गए हैं।
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सोमवार को मेरठ कॉलेज से यूनिवर्सिटी कैंपस पहुंचे लॉ के छात्रों ने प्रो वाइस चांसलर प्रो. एचएस सिंह को बताया कि 50 प्रतिशत छात्रों को प्री पीएचडी कोर्स में फेल कर दिया गया। छात्रों ने मूल्यांकन प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ लॉ में ही नहीं बल्कि दूसरे विषयों में प्री पीएचडी कोर्स में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं फेल हुए हैं। छात्र-छात्राओं का कहना है कि जब वे नेट और जेआरएफ पास कर चुके हैं तो प्री पीएचडी कोर्स वर्क में वे फेल कैसे हो सकते हैं। उन्होंने दोबारा मूल्यांकन की मांग की। प्रो-वाइस चांसलर ने कहा कि रैंडम सैंपलिंग यूनिवर्सिटी की बजाय बाहर के शिक्षकों से कराई जाएगी। इसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो दोबारा से रिजल्ट जारी किया जाएगा।

खास बातें:
सभी विषयों में 50 फीसदी से ज्यादा फेल हो गए छात्र
छात्रों ने प्रो वाइस चांसलर से मिलकर की दोबारा मूल्यांकन की मांग
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